छात्र की सड़क दुर्घटना में होगी मौत तो संस्था होगी जिम्मेदार


जबलपुर: कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह और पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने सड़क सुरक्षा और यातायात जागरूकता पर कलेक्ट्रेट सभागार में महत्वपूर्ण बैठक की। सर्वोच्च न्यायालय की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे के निर्देश पर बुलाई गई इस बैठक में शहर के स्कूल–कॉलेज, कोचिंग संस्थानों और पेट्रोल पंप संचालकों ने भाग लिया। कलेक्टर ने स्कूलों से 15 दिनों के भीतर बसों और ड्राइवरों की फिटनेस रिपोर्ट सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा मानकों का पालन न करने पर निजी स्कूलों की मान्यता तक रद्द की जा सकती है। किसी भी छात्र की सड़क दुर्घटना में मौत होने पर संबंधित संस्था को जिम्मेदार माना जाएगा। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के मामले में जबलपुर का स्थान ऊँचा है। हर साल लगभग 4,000 दुर्घटनाएँ होती हैं और इस वर्ष 523 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 246 मौतें सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण हुईं।

हर महीने लगभग 25 लोग सड़क हादसों में जान गंवा रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए वाहन चलाते समय सीट बेल्ट और हेलमेट हर हाल में लगाना चाहिए। सभी संस्थानों से आग्रह किया गया कि वे विद्यार्थियों को यातायात सुरक्षा के बारे में जागरूक करें, अभिभावकों तक संदेश पहुँचाएँ और वाहन फिटनेस पर सहमति-पत्र भी भरवाएँ।
बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं—पंपों को चेतावनी
पेट्रोल पंप संचालकों से कहा गया कि बिना हेलमेट पेट्रोल न दें। यदि कोई पंप अभियान में सहयोग नहीं करता पाया गया, तो प्रशासन द्वारा पंप सील करने की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
ई-रिक्शा और गैसकिट वाहनों पर निगरानी
एसपी उपाध्याय ने ई-रिक्शा और एलपीजी गैसकिट लगे वाहनों पर नियंत्रण के निर्देश देते हुए कहा कि सीट बेल्ट–हेलमेट को आदत बनाना जरूरी है। शहर के ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षा व्यवस्थाएँ मजबूत करने के भी निर्देश दिए गए। एएसपी ट्रैफिक अंजना तिवारी ने बताया कि चालानी कार्यवाही सुधारात्मक है, लेकिन जीवन बचाने के लिए सुरक्षित यातायात व्यवहार अपनाना आवश्यक है। उन्होंने सभी चालकों को सकारात्मक तरीके से प्रेरित करने की बात कही।

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