गोयल ने भारत-रूस व्यापार में संतुलन की जरूरत पर दिया जोर

नयी दिल्ली, 04 दिसंबर (वार्ता) रूस के साथ द्विपक्षीय व्यापार में अधिक संतुलन और विविधीकरण की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारत और रूस के बीच व्यापार का विस्तार करने और अधिक संतुलित व्यापार संबंध की दिशा में काम करने के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

श्री गोयल ने यहां उद्योग मंडल फिक्की द्वारा आयोजित भारत-रूस व्यापार मंच को संबोधित करते हुए कहा कि उपभोक्ता वस्तुएं, खाद्य उत्पाद, ऑटोमोबाइल, ट्रैक्टर, भारी वाणिज्यिक वाहन, स्मार्टफोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक घटक और वस्त्र ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें रूस को निर्यात की काफी संभावना है।

उन्होंने कहा, “द्विपक्षीय व्यापार 70 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच रहा है, लेकिन हम यहां नहीं रुक सकते। हमें आगे बढ़ना है, हमें (रूस के साथ भारत का व्यापार घाटा) संतुलित करना है।”

मंत्री ने स्वीकार किया कि द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में काफी असंतुलित है। उन्होंने भारतीय निर्यातकों के लिए अप्रयुक्त अवसरों पर जोर देते हुए व्यापार बाधाओं को कम करने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि हम निकट भविष्य में व्यापार असंतुलन को दूर करेंगे और सामूहिक रूप से व्यापार बाधाओं को समाप्त करेंगे, ताकि दोनों देशों के व्यवसायों के लिए अधिक अवसर खोलने के लिए परिस्थितियां तैयार की जा सकें।” उन्होंने कहा कि रूस के कुल आयात में भारत की हिस्सेदारी मात्र दो प्रतिशत है।

भारत और रूस ने वर्ष 2025 तक 30 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा था, जिसे अब लगभग दोगुना कर लिया गया है। यह दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के बढ़ते दायरे को दर्शाता है।

गोयल ने भारत-रूस संबंधों की स्थिरता को भी रेखांकित किया और इसे ऐसा साझेदारी बताया जिसने समय की कसौटी पर खुद को साबित किया है और जो कूटनीति, संस्कृति और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में लगातार मजबूत हो रही है।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के साथ हमारे संबंधों की आत्मा को बड़ी खूबसूरती से व्यक्त किया था, जब उन्होंने कहा था, ‘रूस नाम सुनते ही हर भारतीय के मन में पहला शब्द आता है – भारत का सुख-दुःख का साथी।’ इसका अर्थ है अच्छे और बुरे समय में भारत का साथी और मित्र।”

रूस ने तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से सुरक्षित एक व्यापारिक ढांचा बनाने की अपनी इच्छा व्यक्त की है, जो इस दृष्टिकोण को दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर डॉलर-रहित लेन-देन की प्रवृत्ति धीरे-धीरे मजबूत हो रही है।

 

 

 

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