पांच शिल्प कलाओं को मिला GI टैग, खजुराहो स्टोन क्राफ्ट, छतरपुर फर्नीचर और बैतूल-ग्वालियर की पारंपरिक कलाओं को वैश्विक पहचान

छतरपुर। मध्यप्रदेश की पांच महत्वपूर्ण पारंपरिक शिल्प कलाओं को उनके विशिष्ट भौगोलिक स्वरूप और अद्वितीय गुणों के आधार पर भौगोलिक संकेतक (GI टैग) की मान्यता मिल गई है। केंद्र सरकार के आंतरिक व्यापार विभाग ने खजुराहो स्टोन क्राफ्ट, छतरपुर फर्नीचर, बैतूल भरेवा मेटल क्राफ्ट, ग्वालियर स्टोन क्राफ्ट और ग्वालियर पेपर मैशे क्राफ्ट को आधिकारिक रूप से GI टैग प्रदान किया है।

इस उपलब्धि के बाद इन कलाओं की विशिष्टता देश–दुनिया तक पहुंचेगी और शिल्पकारों के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

डॉ. रजनीकांत के सहयोग से तैयार हुए GI आवेदन

एक वर्ष पहले मध्यप्रदेश सरकार ने नाबार्ड और सिडबी के वित्तीय सहयोग से इन सभी शिल्प कलाओं के लिए GI आवेदन तैयार किए थे।

खजुराहो स्टोन क्राफ्ट, बैतूल भरेवा मेटल क्राफ्ट, ग्वालियर स्टोन क्राफ्ट और ग्वालियर पेपर मैशे के लिए आवेदन नाबार्ड मध्यप्रदेश, जबकि छतरपुर फर्नीचर के लिए सिडबी मध्यप्रदेश की ओर से सहयोग दिया गया।

इन आवेदनों को पद्मश्री डॉ. रजनीकांत के तकनीकी मार्गदर्शन में तैयार किया गया। GI मैन ऑफ इंडिया के नाम से चर्चित डॉ. रजनीकांत ने इसे मध्यप्रदेश के लिए “गर्व का क्षण” बताया।

GI की दिशा में तेजी—25 और उत्पाद प्रक्रिया में

हाल ही नवंबर माह में पन्ना डायमंड को GI टैग मिल चुका है और लगभग 25 अन्य पारंपरिक उत्पाद GI पंजीकरण की अंतिम चरण में हैं।

एमएसएमई मंत्री चौतन्य कुमार काश्यप ने राज्य के सभी शिल्पकारों को बधाई देते हुए कहा कि “जीआई रजिस्ट्री चेन्नई में पंजीकरण से इन कलाओं और कलाकारों में क्रांतिकारी परिवर्तन आएंगे।”

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी बधाई

मुख्यमंत्री ने पांच शिल्प कलाओं को GI टैग मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा—

“यह हमारी विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने वाला गौरवपूर्ण क्षण है। यह हमारे शिल्पकारों की प्रतिभा और सृजनशीलता का सम्मान है। प्रदेश की कला–संस्कृति विश्व स्तर पर और अधिक प्रतिष्ठा हासिल करे—इसी कामना के साथ सभी शिल्पकारों को हृदय से बधाई।”

इस उपलब्धि के साथ मध्यप्रदेश की प्राचीन कला परंपरा को नई पहचान मिली है और स्थानीय शिल्पकारों के लिए नए अवसर खुलने की संभावना है।

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