जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता का छटवीं बार किया गया स्थानांतरण अनुचित पाते हुए उस पर रोक लगा दी है। उक्त अंतरिम आदेश के साथ ही न्यायालय ने मामले में मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल के प्रबंध संचालक, मुख्य महाप्रबंधक, मानव संसाधन व प्रशासन, मुख्य अभियंता भोपाल क्षेत्र को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।
यह मामला याचिकाकर्ता मप्र मध्य क्षेत्र विवि कंपनी संचालन एवं संधारण राजगढ़ में प्रबंधक मानव संसाधन के पद पर कार्यरत धीरज कुमार चौरे की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से अधिवक्ता विजय राघव सिंह, पूनम सिंह, अजय नंदा व मनोज चतुर्वेदी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता को 2019 से अब तक पांच बार स्थानांतरण आदेश थमाया गया है।
पहले राजगढ़ से नर्मदापुरम, फिर नर्मदापुरम से विदिशा, इसके बाद विदिशा से बैतूल और बैतूल से शिवपुरी इसके बाद शिवपुरी से राजगढ़ और अब राजगढ़ से भिंड स्थानांतरण किया गया है। यह स्थानांतरण बिना किसी प्रशासनिक दृष्टिकोण एवं आवश्यकता के किया गया। इतना ही नहीं हद तो तब हो गयी जब राजगढ़ से भिंड पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर स्थानांतरण किया गया।
प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर स्थानांतरण का मतलब है कि एक कर्मचारी को सार्वजनिक हित या विभाग के सुचारू संचालन जैसे प्रशासनिक कारणों से स्थानांतरित किया जा सकता है। हालांकि, यह अधिकार असीमित नहीं है और स्थानांतरण आदेशों को दुर्भावनापूर्ण या परिचालन दिशा निर्देशों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। स्थानांतरण जनहित में तभी माना जाएगा जब वह प्रशासनिक आवश्यकता पर आधारित हो, न कि केवल कर्मचारी के अनुरोध पर। किसी कर्मचारी के अनुरोध पर याचिकाकर्ता को अपनी वर्तमान पद स्थापना से 565 किलोमीटर दूर स्थानातंरित किया दुर्भावना को दर्शाता है।
