
बेगमगंज। बेगमगंज तहसील के गांव गोपई नईगढ़िया में यादव समाज ने मृत्युभोज और तेरहवीं जैसी कुप्रथाओं को जड़ से खत्म करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। सबसे पहले प्रतिष्ठित राजा परिवार ने इसकी शुरुआत की। राजा राजकुमार सिंह यादव के सुपुत्र एवं जिला पंचायत सदस्य दिग्विजय सिंह यादव (बड़े राजा) और उनके छोटे भाई वृषभदेव सिंह यादव (छोटे राजा) अमित राजा के भाई स्वर्गीय कुंवर अप्पू राजा का 20 नवंबर को निधन हो गया था। परंपरा के अनुसार तेरहवीं और मृत्युभोज का आयोजन होना था, लेकिन क्षेत्र के वरिष्ठ समाजसेवियों के आग्रह पर राजपरिवार ने तेरहवीं न करने और मृत्युभोज पूरी तरह बंद करने का साहसिक निर्णय लिया।
2 दिसंबर को आयोजित श्रद्धांजलि सभा में पूर्व मंत्री एवं विधायक राव ब्रजेंद्र सिंह यादव, पूर्व मंत्री रामपाल सिंह राजपूत, यादव महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र सिंह मंडलोई, प्रदेश उपाध्यक्ष शेर सिंह यादव दाऊ,पूर्व नपाध्यक्ष मलखान सिंह जाट,वरिष्ठ समाजसेवी दरयाव सिंह यादव,पूर्व नपाध्यक्ष मुकेश राय,मलखान सिंह यादव,चंद्रभान सिंह,वीरेंद्र सिंह यादव, नवलकिशोर बबलू यादव, अनिल यादव जिलाध्यक्ष ,कृष्णा बिट्टू यादव पत्रकार,जगन्नाथ यादव,बैजनाथ सिंह एड,संदीप यादव,ओंकार यादव,कमल सिंह सरपंच राजू यादव वीर सिंह यादव सहित सैकड़ों जनप्रतिनिधि और क्षेत्रवासी शामिल हुए। सभा को संबोधित करते हुए राव ब्रजेंद्र सिंह यादव ने कहा कई वर्ष पहले अशोकनगर जिले में तेरहवीं और मृत्युभोज का बहुत चलन था। मेरे पिता के अथक प्रयासों से हमारे क्षेत्र से यह प्रथा खत्म हुई। आज नईगढ़िया राजपरिवार ने समाज हित में जो साहस दिखाया है, वह आने वाले समय में पूरे यादव समाज के लिए रास्ता दिखाएगा। यह फैसला न केवल आर्थिक बोझ कम करेगा, बल्कि समाज को दिखावे की संस्कृति से भी मुक्ति दिलाएगा।
एक ही घराने में दूसरा बड़ा फैसला-
इसी राजघराने में कुछ ही दिनों बाद दूसरा दुखद समाचार आया। राजा विक्रम सिंह यादव की मां रानी जय कुंवर बाई का 29 नवंबर को स्वर्गवास हो गया। यहां भी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने पहुंचकर तेरहवीं और मृत्युभोज न करने का आग्रह किया। परिवार ने तुरंत सहमति जताई और 10 दिसंबर को केवल श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने का निर्णय लिया। मंगलवार को यादव समाज का बड़ा प्रतिनिधिमंडल उनके निवास पहुंचा और इस फैसले पर मुहर लगाई।
ऐसा दिखावा किस काम का जो गरीब को कर्जदार बना दे-
यादव महासभा के वरिष्ठ नेता दामोदर मंडलोई ने सभा में कहा ऐसा दिखावा किस काम का जो गरीब को कर्जदार बना दे, अगर किसी के पास देने की इच्छा और सामर्थ्य है तो मृत्युभोज के बजाय गरीबों को दान करें, कन्या की शादी में मदद करें। शास्त्रों में मृत आत्मा की शांति के लिए तर्पण और ब्राह्मण भोज का उल्लेख है, लेकिन सामूहिक मृत्युभोज का कहीं जिक्र नहीं है। इसे भव्य आयोजन बनाना उचित नहीं है।
