राहतगढ़। पंचकल्याणक महामहोत्सव के अंतर्गत ज्ञानकल्याणक दिवस पर मुनि श्री संधानसागर द्वारा संकलित पुस्तक प्रज्ञापराध का विमोचन किया गया। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि पुस्तक में राजनीति, शिक्षा, धर्म और व्यापार सहित अनेक क्षेत्रों में बढ़ रहे बुद्धि-अपराध को रेखांकित किया गया है। इसमें आचार्य श्री विद्यासागरजी के उपदेशों से संकलित 15-20 महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं, जो युवा पीढ़ी को विकृत विचारों एवं भ्रष्टाचार से दूर रहने की प्रेरणा देते हैं।
मोक्षकल्याणक दिवस पर मुनि श्री प्रमाणसागर के सानिध्य में नौ रथ, दो सफेद और दो काले हाथियों के साथ सात गजरथ फेरियां निकाली गईं। मुनि श्री ने इच्छाओं की चाह, दाह और राह पर प्रवचन देते हुए कहा कि मोह और चाह का त्याग ही मोक्ष की दिशा दिखाता है। लगभग दस हजार श्रद्धालुओं की उपस्थिति में यह ऐतिहासिक आयोजन संपन्न हुआ, जिसे राहतगढ़ के 250 वर्षों का विशेष प्रसंग बताया गया।
