
इंदौर. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर प्रदेशभर में आयोजित गीता जयंती महोत्सव का इंदौर में भव्य रूप देखने को मिला. बॉस्केटबॉल कॉम्पलेक्स में सुबह से ही स्कूली बच्चों, संतों और गीतानुरागियों का सैलाब उमड़ा. 4500 से अधिक विद्यार्थियों ने एक साथ बैठकर सामूहिक गीता स्वाध्याय और प्रेरणागीत का गायन किया तो पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा.
हमारी टीम ने स्थल पर पहुंचकर देखा कि मंच पर शहर के जनप्रतिनिधियों और संतसमाज की मौजूदगी के बीच योगेश्वर श्रीकृष्ण के उपदेशों पर आधारित ‘पुरुषोत्तम योग श्रीमद्भगवद् गीता’ का लोकार्पण किया गया. महापौर पुष्यमित्र भार्गव, नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव, जिला शिक्षा अधिकारी शांतास्वामी भार्गव सहित बड़ी संख्या में विद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक और संतगण मौजूद थे. संत समाज के उद्बोधन के दौरान माहौल भाव-विभोर हो गया. अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के स्वामी जगतगुरु रामदयाल महाराज ने कहा कि प्रदेश में आज दिवाली जैसा उल्लास है. उन्होंने गीता को ‘मास्टर चाबी’ बताते हुए कहा कि जीवन की हर कठिनाई का समाधान इसी में निहित है. उनके मुताबिक गीता भगवान से मित्रता करना सिखाती है और अर्जुन की तरह हर व्यक्ति को समय का मूल्य समझकर आगे बढ़ना चाहिए. बाबा साहब डॉ. प्रदीप तराणेकर ने ‘पुरुषोत्तम योग’ की व्याख्या करते हुए इसे ब्रह्मविद्या, योगविद्या और वेदविद्या का समुच्चय बताया. उन्होंने कहा कि गीता मनुष्य को निराशा से आशा और अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है. स्वामी सुश्री परमानंदा ने गीता को ‘विश्व-वंदनीय माता’ बताया, जबकि स्वामी ऐश्वर्यानंद ने इसे श्रीकृष्ण की अमृतवाणी कहा, जिसका पान हर किसी को करना चाहिए. स्थल पर विश्व गीता प्रतिष्ठान उज्जैन की ओर से संस्था की स्थापना और उद्देश्य की जानकारी दी गई. बच्चों और उपस्थित जनों ने संतों के साथ गीता के श्लोकों का उच्चारण कर अद्भुत सामूहिकता का अनुभव किया. कार्यक्रम का संचालन सुनयना शर्मा ने किया और समापन गीता आरती के साथ हुआ. इंदौर में गीता जयंती महोत्सव ने आध्यात्मिकता, संस्कृति और युवा ऊर्जा का ऐसा संगम प्रस्तुत किया, जिसने आयोजन को दिनभर शहर की चर्चा में बनाए रखा.
