नयी दिल्ली, 30 नवंबर (वार्ता) नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने बंगलादेश को “मित्र” बताते हुए, विश्वास व्यक्त किया है कि पड़ोसी देश में फरवरी 2026 में होने वाले संसदीय चुनावों के बाद एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के 149वें कोर्स की पासिंग आउट परेड में शामिल होने पुणे पहुंचे नौसेना प्रमुख ने कहा, “मैं अभी भी बंगलादेश को एक दोस्त के अलावा कुछ और कहने से बचूंगा, क्योंकि यह एक अस्थायी दौर हो सकता है। हमें इंतजार करना होगा, चुनाव होने हैं, और फिर कुछ और हो सकता है।”
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नौसेना प्रमुख का कार्यभार संभालने के बाद उनकी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा बंगलादेश की थी। उन्होंने कहा, “मुझे किसी ‘चकाचौंध वाली’ राजधानी में जाना था, लेकिन मैंने कहा, ‘नहीं। मुझे पहले बंगलादेश जाना चाहिए।’ मैं एक शाश्वत आशावादी हूं और मुझे उम्मीद है कि जहां तक बंगलादेश का संबंध है, चीजें बदल जाएंगी।”
इससे पहले, पुणे में एडमिरल जेजी नाडकर्णी मेमोरियल में अपने संबोधन में नौसेना प्रमुख ने “भू-राजनीति, प्रौद्योगिकी और रणनीति में अभूतपूर्व बदलाव” के बीच राष्ट्रीय समुद्री हितों की सुरक्षा में भारतीय नौसेना की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।
नौसेना प्रमुख ने चेतावनी दी कि भारत का समुद्री पड़ोस “तीव्र भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा” से तेज़ी से प्रभावित हो रहा है, जिसका उदाहरण उन्होंने लाल सागर संकट, पश्चिमी प्रशांत में तनाव और हिंद-प्रशांत में बढ़ती बड़ी शक्तियों की प्रतिद्वंद्विता को दिया।
उन्होंने कहा कि विश्लेषक इस क्षेत्र को एक “भीड़-भाड़ वाला और विवादित रणनीतिक क्षेत्र” बताते हैं, जहां बढ़ते रक्षा खर्च और तेजी से नौसैनिक आधुनिकीकरण ने शक्ति गतिशीलता को नया रूप दिया है। उन्होंने कहा कि बड़े बहुपक्षीय मंच “बहुत धीमे या बहुत विभाजित” साबित हो रहे हैं, जिससे क्षेत्र को लघु-पक्षीय, मुद्दा-आधारित सुरक्षा समूहों की ओर धकेल दिया गया है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि युद्ध की तैयारी “हमारा सबसे प्रमुख ध्यान” बना हुआ है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि नौसेना की त्वरित तैनाती, 96 घंटों के भीतर फायरिंग, और एक वाहक युद्ध समूह (कैरियर बैटल ग्रुप) की उपस्थिति ने स्पष्ट संदेश दे दिया था, जिससे पाकिस्तान नौसेना अपने जल क्षेत्र तक ही सीमित रही।
