रादुविवि: कार्यपरिषद बैठक के दौरान हंगामा, एनएसयूआई ने बजायी पुंगी

जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (आरडीयू) में तनातनी के माहौल में कार्य परिषद (ईसी) की बैठक हुई। बैठक में कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाना था, लेकिन कर्मचारियों की नाराज़गी और विश्वविद्यालय परिसर में तनाव ने माहौल को गर्म बना दिया। कर्मचारी पिछले कई दिनों से भर्ती व नियमितीकरण सहित लंबित मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। गुरुवार को बैठक से पहले ही बड़ी संख्या में कर्मचारी विश्वविद्यालय पहुंचे और मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया। पुलिस के पहरे में बैठक शुरू की गई। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन कटौती और अवकाश संबंधी प्रशासनिक निर्णयों से वे आहत हैं। उधर प्रशासन ने ईसी बैठक में प्रस्ताव रखा कि हड़ताल के दिनों को अर्जित अवकाश में समायोजित किया जाए। यह प्रस्ताव कर्मचारियों में असंतोष का कारण बना। संघ के महासचिव ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने 26 नवंबर तक के अर्जित अवकाश को समायोजित करने का सुझाव दिया था, लेकिन अक्टूबर माह में त्योहारों के चलते अवकाश कम होने से कर्मचारी इस निर्णय से सहमत नहीं रहे।

कई मुद्दों पर चर्चा

ईसी बैठक में लिफ्टमैन, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, दिव्यांगजन भर्ती, वॉक-इन-इंटरव्यू और तृतीय–चतुर्थ श्रेणी के नियुक्ति आदेश समेत कई बिंदुओं पर चर्चा हुई। विभागीय नियमों के अनुसार, अप्रैल 2023 को जारी विज्ञापन के आधार पर चयन प्रक्रिया रोकी गई थी। इसी बीच लिफ्टमैन ने उच्च न्यायालय में याचिका लगाई, जिसके बाद नियुक्तियों पर रोक लगी हुई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बैठक में बताया कि कानूनी जटिलताओं के कारण पूर्व प्रक्रिया अटकी हुई है।दूसरी ओर, एनएसयूआई के छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन करते हुए ईसी सदस्यों को घेरा और मांग की कि ठप प्रक्रियाओं को तत्काल बहाल किया जाए। छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन जानबूझकर नियुक्तियों को लटकाए हुए है और शिक्षकों की कमी से शिक्षण प्रभावित हो रहा है। एनएसयूआई ने हड़ताली कर्मचारियों के समर्थन में भी नारेबाजी की।

बैठक में स्थायी समिति की रिपोर्ट भी रखी गई। समिति ने 18 सितंबर 2023 को गठित हुई थी और नवंबर 2024 में 44 बिंदुओं पर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में कई पदों की आवश्यकता, शिक्षक भर्ती, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की संख्या तथा पुराने मामलों के निपटान पर सुझाव दिए गए। ईसी सदस्यों ने इन बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की, लेकिन कई विषयों पर आगे निर्णय आगामी बैठक तक टाल दिया गया। अंत में कुलपति और कार्यपरिषद ने कहा कि कर्मचारियों व छात्रों की मांगों पर विचार किया जा रहा है, लेकिन सभी निर्णय नियमानुसार और वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।

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