जबलपुर: तेंदुओं ने आम इंसान के बीच रहने का सामंजस्य धीरे-धीरे करके स्थापित कर लिया है और अब वह किसानों, ग्रामीणों के द्वारा जंगली इलाकों में छोड़े जा रहे बकरी, कुत्तों व मवेशियों के शिकार के इंतजार में रहकर शिकार कर रहा है। वन्य प्राणी विशेषज्ञों और वन विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर नवभारत को बताया कि जिन जिन इलाकों में तेंदुओं का मूवमेंट अधिक ठंड में हो गया है उन इलाकों में तेंदुओं ने इंसानों के बीच रहने का सामंजस्य बना लिया है।
जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण है कि बीते कई सालों से हर वर्ष तेंदुए का मूवमेंट तो होता है , वो दिखाई भी देता है लेकिन उसने कभी इंसान पर हमला आज तक नहीं किया है।जानकारी के अनुसार ग्रामीणों व किसानों द्वारा बकरियां, मवेशियों को चरने के लिए जंगल तरफ छोड़ दिया जाता है और फिर आसानी से भूख लगने पर तेंदुआ इनका शिकार कर लेता है। मतलब साफ है कि ग्रामीणों द्वारा खुद तेंदुए को शिकार परोसा जा रहा है जबकि वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीणों को सतर्क रहने की जरूरत है और अपने मवेशियों को घर के पास ही चराने के लिए छोड़े न कि जंगल में।
कटनी बॉर्डर से हो रहा तेंदुओं का आवागमन
जानकारी के अनुसार पाटन रेंज के कटंगी, नाहनदेवी मंदिर के पास स्थित मिरकी गांव में एक तेंदुए का मूवमेंट, सिहोरा के माल्हा ग्राम स्थित शासकीय स्कूल के पास दो तेंदुए , खमरिया स्थित घाना के चर्च के पास एक तेंदुआ और बरगी के पास एक तेंदुए का मूवमेंट बीते कई दिनों से देखा जा रहा है। घाना से कुंडम तक के इलाके में भी तेंदुए की जंगली इलाकों में चहलकदमी देखी गई है। जानकारों का स्पष्ट कहना है कि कटनी बॉर्डर से लगे घाना के क्षेत्र में तेंदुओं का आवागमन इसी रास्ते से हो रहा है।
इनका कहना है
रेस्क्यू टीम प्रतिदिन सक्रिय है जिन इलाकों में तेंदुए का मूवमेंट अधिक है उन इलाकों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया जा रहा है। इसमें जागरूकता और सतर्कता की काफी जरूरत है जिसे ग्रामीणों को पालन करना चाहिए। वन विभाग अपने स्तर पर अलर्ट है।
ऋषि मिश्रा डीएफओ, जबलपुर।
