ब्यावरा: एक बार फिर प्याज ने किसानों को मायूस किया है. वर्तमान में प्याज के भाव औंधे मुंह गिरे हुए है. कृषि मंडी में प्याज 60 पैसे, 2 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है, इस तरह लागत और मेहनत भी नहीं निकल पा रही है. प्याज के गिरते दामों से किसान काफी मायूस है.विदित है कि विगत कुछ माह से ब्यावरा कृषि उपज मंडी में प्याज और लहसुन की खरीदी का कार्य प्रारंभकर दिया गया है. ऐसे में यहां प्याज और लहसुन की काफी आवक हो रही है, परन्तु प्याज के कम दामों ने किसानों को निराश किया हुआ है.
स्थानीय कृषि मंडी में मंगलवार को 60 पैसे, 2 रुपये प्रति किलो तक प्याज बिका. अच्छे से अच्छा प्याज अधिकतम 7 रुपये प्रति किलो तक बिक सका. प्याज की इतनी कम कीमत मिलने पर कुछ किसानों ने मंडी में प्याज नहीं बेचते हुए वह प्याज को वापस अपने घर ले गये.इससे अधिक तो भाड़ा लग गया जिले की सीमा पर मौजूद ग्राम छायन से आये किसान ने बताया कि वह करीब 55 किमी दूर से ट्रेक्टर ट्रॉली में प्याज लेकर आये. परन्तु यहां उनका प्याज 60 पैसे प्रति किलो एवं 2 रुपये प्रति किलो बिका. इसी प्रकार ग्राम मोठबडली निवासी कृषक ने बताया कि उनका प्याज 2 रुपये प्रति किलो बिका.
वापस घर ले गये प्याज
कुछ किसानों के द्वारा काफी कम कीमत मिलने पर प्याज मंडी में नही देते हुए वह वापस अपने घर ले गये. ग्राम परसुलिया निवासी कृषक के अनुसार उनका प्याज 50 पैसे प्रति किलो बिका परन्तु वह यहां प्याज नहीं देते हुए वापस प्याज को अपने घर ले जा रहे है.तीन दिन होती है प्याज-लहसुन की मंडी ब्यावरा स्थित कृषि उपज मंडी में प्याज, लहसुन की मंडी तीन दिन मंगलवार, बुधवार एवं गुरुवार को होती है.
25 नवम्बर को मंडी में प्याज का न्यूनतम भाव 60 पैसे, 2 रुपये प्रति किलो रहा. इसके पूर्व 18 नवम्बर को प्याज 1 रुपये 30 पैसे किलो से 6 रुपये 80 पैसे किलो बिका. 19 नवम्बर को प्याज 2 रुपये 10 पैसे से 7 रुपये 55 पैसे प्रति किलो के भाव बिका. क्वालिटी के हिसाब से भाव निर्धारित करते इस संबंध में व्यापारी प्रतिनिधियों का कहना है कि क्वालिटी के हिसाब से भाव निर्धारित किए जाते
है. जैसी क्वालिटी होगी उसी के अनुसार रेट होते है.
अच्छी क्वालिटी होने पर अच्छे दाम होते है. एक बीघा में 80 से 100 क्विंटल तक उत्पादन प्याज का उत्पादन अच्छा खासा होता है. जानकारों के अनुसार एक बीघा में 80 से 100 क्विंटल तक प्याज का उत्पादन हो जाता है. इस फसल में नुकसान होने की भी संभावना काफी कम रहती है. उद्यानिकी विभाग के अनुसार गत वर्ष 2024-25 में जिले में प्याज का रकबा लगभग 11 हजार हेक्टर तक रहा था
