
नई दिल्ली, 26 नवंबर, 2025: देशभर में लाखों टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स रिफंड का इंतजार है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ रही है। ITR रिफंड में देरी के पांच मुख्य कारण सामने आए हैं। सबसे आम कारण गलत बैंक या PAN डिटेल दर्ज करना है, जबकि दूसरा बड़ा कारण हाई-वैल्यू क्लेम पर विभाग द्वारा की जाने वाली अतिरिक्त जांच (स्क्रूटनी) है, जिसमें काफी समय लग जाता है।
प्री-वैलिडेशन फेल होने पर रुकता है रिफंड
रिफंड अटकने का एक और बड़ा कारण बैंक अकाउंट का बंद होना या ई-फाइलिंग पोर्टल पर उसका प्री-वैलिडेशन फेल होना है। रिफंड केवल उसी एक्टिव और प्री-वैलिडेटेड बैंक अकाउंट में आता है। इसके अलावा, ITR फाइल करने के बाद 30 दिन के अंदर ई-वेरिफिकेशन न करना या लंबित टैक्स डिमांड होना भी देरी का प्रमुख कारण है।
डेटा मिसमैच होने पर रिटर्न डिफेक्टिव
अगर आपके रिटर्न में भरी गई जानकारी, विभाग के पास मौजूद 26AS या TIS डेटा से मेल नहीं खाती है, तो रिफंड रोक दिया जाता है। ITR में कोई गंभीर गलती पाई जाती है, तो रिटर्न को “डिफेक्टिव” घोषित कर दिया जाता है। देरी होने पर टैक्सपेयर्स को तुरंत ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग-इन करके स्टेटस चेक करने और किसी भी गलती को सुधारने की सलाह दी गई है।
