
भोपाल। समन्वय भवन में मेपेक्स 2025 के दूसरे दिन प्रदर्शनी का माहौल पूरी तरह रंगीन और जीवंत नजर आया। प्रदर्शनी में दिन भर लोग इतिहास को उकेरती हुई तस्वीर और उसकी कहानियों को देखने के लिए आते रहे। इन डाक टिकटों के माध्यम से लोगों ने मौजूद फिलेटलिस्ट से इनके संग्रह, इतिहास और क्रम के बारे में बारीकी से समझा। कार्यक्रम के दूसरे दिन शनिवार को भोजताल और नर्मदा नदी पर विशेष आवरण का विमोचन हुआ। जो भोपाल की सांस्कृतिक पहचान की एक सुंदर झलक पेश करता है। भोजताल के तीन सौ वर्ष पुराने इतिहास और इसकी जैव विविधता को लेकर मुख्य पोस्टमास्टर जनरल विनीत माथुर ने कहा कि फिलेटली हमारे इतिहास और प्रकृति की अनमोल कहानियों को संरक्षित करती है। प्रदर्शनी के दूसरे दिन क्विज कार्यशाला और नृत्य प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्साहपूर्ण बनाए रखा। बड़ी संख्या में आए छात्र अभिभावक और नागरिक टिकटों की रंगीन दुनिया में डूबे दिखाई दिए।
क्या है फिलेटली और प्रदर्शनी
फिलेटली डाक टिकटों का व्यवस्थित संग्रह एक ऐसा शौक है जो इतिहास संस्कृति और वैश्विक घटनाओं को छोटे से फ्रेम में संजो देता है। और ऐसा करने वाले को ही फिलेटलिस्ट कहते हैं। फिलेटलिस्ट अरविंद खोडके ने बताया कि टिकट संग्रह केवल शौक नहीं बल्कि अध्ययन की विधा है। मेपेक्स में टिकटों का प्रदर्शन मैगज़ीमा शैली में किया गया है जहां टिकट और उनसे जुड़े तथ्य एलबम जैसे कवर में संरक्षित रूप से प्रदर्शित किए जाते हैं। इस शैली में प्रस्तुति साफ सुथरी व्यवस्थित और विषय आधारित होती है। जिससे दर्शकों को समझने में आसानी होती है।
दुर्लभ टिकटों का खजाना चार करोड़ के संग्रह
प्रदर्शनी की सबसे बड़ी विशेषता यहां प्रदर्शित वह विशाल संग्रह है जिसकी अनुमानित कीमत चार करोड़ रुपये तक बताई जा रही है। इसमें प्री इंडिपेंडेंस और पोस्ट इंडिपेंडेंस दोनों दौरों के टिकट प्रदर्शित हैं और बीस से अधिक विषयों पर आधारित संग्रह दर्शकों के लिए बीते इतिहास की कहानी को जीवंत बना रहे हैं। इसमें टेक्सटाइल, फूड, ट्रैवल, एजुकेशन, स्पोर्ट्स, स्वतंत्रता सेनानियों, पहली हवाई उड़ान, क्वीन एलिजाबेथ के शासन की 25 वीं सालगिरह का संग्रह सहित अन्य कई विषयों पर आधारित टिकट मौजूद हैं।
फिलेटली की खासियत
फिलेटलिस्ट अरविंद खोडके ने बताया कि डाक टिकट संग्रह इतिहास और संस्कृति को समझने का सबसे सरल और रोचक तरीका है। छोटा सा टिकट देश की पहचान, राजनीतिक घटनाओं, वैज्ञानिक उपलब्धियों और प्राकृतिक विरासत को संजोता है। यह शौक धैर्य बढ़ाने के साथ ज्ञान को समृद्ध करता है। साथ ही दुनिया को देखने की दृष्टि विकसित करता है
