एमजीएम कॉलेज में फिर रैगिंग , फ्रेशर्स को फ्लैट पर ले जाकर पीटा, तीन घंटे तक कमरे में बंद रखा

इंदौर: महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है. एमबीबीएस फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स ने राष्ट्रीय एंटी-रैगिंग सेल को शिकायत भेजकर आरोप लगाया कि 2024 बैच के सीनियरों ने उन्हें रात में निजी फ्लैट पर बुलाकर मारपीट, गाली-गलौज और शराब-सिगरेट के लिए मजबूर किया. शिकायत पर कार्रवाई करते हुए कॉलेज प्रशासन ने चार सीनियर छात्रों को एक माह के लिए निलंबित कर दिया है.

एमजीएम मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का यह नया मामला ऐसे समय में सामने आया है जब संस्थान पिछले दो सालों से लगातार रैगिंग विवादों में घिरा हुआ है. बार-बार चेतावनी, जांच और कार्रवाई के बाद भी कैंपस में भय और दबाव की पुरानी संस्कृति जस की तस बनी हुई है, यहां एक फिर रैगिंग का वायरस फैल गया है. प्राप्त जानकारी के अनुसार फ्रेशर्स ने 18 नवंबर को यूजीसी एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी.

अगले दिन प्रकरण कॉलेज प्रशासन के पास पहुंचा और 20 नवंबर को एंटी-रैगिंग सेल की तत्काल बैठक बुलाकर कार्रवाई शुरू कर दी गई. पीड़ित छात्रों कमेटी के सदस्यों को बताया कि 2024 बैच के कुछ सीनियर उन्हें रात में एक निजी फ्लैट पर लेकर गए. अंदर पहुंचते ही गाली-गलौज, धमकाने और थापड़-घूंसों से मारपीट शुरू हो गई. छात्रों का आरोप है कि उन्हें शराब-सिगरेट पीने का दबाव भी बनाया और करीब तीन घंटे तक कमरे में बंद रखकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया. शिकायत में यह भी बताया गया है कि उन्हीं के बैच का एक छात्र सीनियरों का मैसेंजर बनकर काम कर रहा था और उसी ने फ्रेशर्स को फ्लैट तक बुलाने की व्यवस्था की.

तनाव में है छात्र
फ्रेशर्स ने अपनी शिकायत में साफ लिखा है कि घटना के बाद वे गंभीर तनाव में हैं और क्लास, हॉस्टल, कहीं भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे. उन्होंने सुरक्षा बढ़ाने और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है.

यूजीसी ने जारी किया नोटिस
शिकायत सामने आने के बाद यूजीसी ने कॉलेज को नोटिस जारी किया है. निर्देशों में कहा गया है कि. पीड़ित छात्रों की पहचान कर काउंसलिंग की जाए, उनकी सुरक्षा की व्यवस्था की जाए, तत्काल जांच शुरू कर विस्तृत रिपोर्ट भेजी जाए, शिकायतकर्ताओं की पहचान गोपनीय रखी जाए.

पहले भी पूर्व छात्रों ने किया था खुलासा
वहीं कई पूर्व छात्रों ने खुलासा किया था कि सीनियर थप्पड़ मारते हैं, घंटों स्म्ॉट्स और पुश-अप्स करवाते हैं और मानसिक दबाव बनाते हैं. यह सब ऐसे तरीके से किया जाता है कि शरीर पर कोई निशान न दिखे, जिससे शिकायत साबित करना मुश्किल हो जाए.

पहले भी फैला था रैगिंग का वायरस…
हाल ही में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की एक पीजी डॉक्टर ने सीनियर रेजिडेंट्स पर मानसिक प्रताड़ना, झूठे आरोप लगाने और अतिरिक्त नाइट ड्यूटी देने की शिकायत की थी. तनाव इतना बढ़ा कि उनका 22 किलो वजन कम हो गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था

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