इंदौर: शहर के रिटायर्ड मेडिकल अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 4.32 करोड़ रुपए से ठगने वाले गिरोह पर स्टेट साइबर सेल ने तगड़ा प्रहार किया है. साइबर ठगों द्वारा राशि गुजरात, गोवा, यूपी और तेलंगाना के 6 बैंक खातों में घुमाई गई थी, जिन्हें साइबर सेल ने तत्काल फ्रीज करवाकर मध्य प्रदेश से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. आरोपी अदालत में पेश किए गए और जेल भेजे जा चुके हैं.
स्टेट साइबर सेल इंदौर की टीम निरीक्षक सरिता सिंह ने बताया कि इंदौर में रहने वाले सेवानिवृत्त मेडिकल अधिकारी के साथ डिजिटल अरेस्ट जैसी सुनियोजित साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है. साइबर ठगों ने स्वयं को ट्राई अधिकारी बताकर पीड़ित को यह विश्वास दिलाया कि उनका आधार कार्ड मुंबई के 538 करोड़ के मनी लांड्रिंग केस में इस्तेमाल हुआ है.
इसके बाद एक महीने तक लगातार कॉल, वीडियो कोर्टरूम दिखाकर डराने और संपत्ति का ब्यौरा मांगने के बाद पीड़ित से चार करोड़ 32 लाख रुपए विभिन्न खातों में ट्रांसफर करा लिए. ठगों ने पीड़ित को बच्चों और रिश्तेदारों से बात करने तक से रोके रखा. यहां तक कि जब पीड़ित एफडी तोड़ने के लिए बैंक पहुंचे, तब भी उन्होंने बैंक स्टाफ को मुंबई में फ्लैट खरीदने का कारण बताकर बात टाल दी.
शिकायत मिलते ही स्टेट साइबर सेल ने गृह मंत्रालय के समन्वय प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए मुंबई सहित कई राज्यों के खातों को फ्रीज कराया. सभी ट्रांजैक्शंस का ट्रेल खंगालते हुए टीम ने एक-एक लिंक जोड़कर ठगी से जुड़े तीन आरोपियों को पकड़ लिया. जिसमें मुख्य रुप से सादिक पटेल, निवासी पंथमुंडला, जिला देवास शाहिद खान, निवासी जानसापुरा, उज्जैन, सोहेल खोकर, निवासी रतलाम, हाल निवास भोपाल है. तीनों को कोर्ट में पेश किया था जहां से उन्हें जेल भेज दिया.
एक महीने तक मनोवैज्ञानिक दबाव में रहा पीड़ित ठगों ने पीड़ित को लगातार यह कहकर भ्रमित किया कि उनके खिलाफ वित्तीय अपराध में गिरफ्तारी वारंट जारी हो सकता है. फर्जी ऑनलाइन कोर्ट की सुनवाई दिखाकर उन्हें घंटों तक बांधे रखा. डर के माहौल में पीड़ित ने किसी से सलाह तक नहीं ली और घर गिरवी रखकर लोन लेने की तैयारी तक कर ली थी.
