उच्च न्यायालय ने पेपरलीक मामले में तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की

जयपुर, 21 नवम्बर (वार्ता) राजस्थान उच्च न्यायालय ने महिला सुपरवाइज़र भर्ती–2018 के पेपरलीक एवं नकल मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों पौरव कालेर, राजाराम उर्फ राजू मैट्रिक्स और सुमन बेरा की शुक्रवार को जमानत याचिकाएँ खारिज कर दीं।

न्यायमूर्ति चंद्रप्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया।

इससे पहले अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी ने अदालत को बताया कि पौरव कालेर ने राजाराम उर्फ राजू मैट्रिक्स और बीकानेर के स्कूल संचालक दिनेश सिंह के साथ मिलकर परीक्षा प्रारंभ होने से पूर्व प्रश्नपत्र लीक करवाया। इसके बाद ब्लूटूथ जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से अभ्यर्थियों को नकल कराई गई। इस प्रक्रिया के एवज में कालेर को 15 लाख रुपये मिले थे। नकल के आधार पर चार अभ्यर्थी चयनित हुए, जिनमें सुमन बेरा स्वयं भी शामिल है।

अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि पौरव कालेर पर वर्ष 2014 से 2025 तक पेपरलीक और नकल से जुड़े आठ मामले दर्ज हैं। राजू मैट्रिक्स के विरुद्ध भी चार पेपरलीक एवं नकल के मामले लंबित हैं। राजू मैट्रिक्स स्वयं महिला सुपरवाइज़र परीक्षा में प्रश्नपत्र की फोटो लेकर कालेर को भेजने में शामिल पाया गया था। अभियोजन ने तर्क दिया कि आरोपियों की गतिविधियों ने भर्ती प्रक्रिया की पवित्रता को क्षति पहुंचाई है, ऐसे में उन्हें जमानत नहीं मिलनी चाहिए।

वहीं, आरोपियों की ओर से कहा गया कि वे लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं, जांच पूर्ण हो चुकी है और मुकदमे में समय लगेगा, इसलिए उन्हें जमानत मिलनी चाहिए। इस पर अदालत ने यह तर्क अस्वीकार करते हुए कहा कि गंभीर आरोपों और परीक्षा प्रणाली में व्यापक भ्रष्टाचार के मद्देनजर जमानत देना उचित नहीं होगा।

 

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