फर्जी सीमांकन और मारपीट के बाद न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर किसान

मंडला। जनपद पंचायत मोहगांव के अंतर्गत ग्राम पंचायत झुरगी पौड़ी में एक गरीब आदिवासी किसान अपनी ही पुश्तैनी जमीन को बचाने के लिए सिस्टम और समाज के प्रभावशाली लोगों से अकेले लोहा ले रहा है।

जानकारी अनुसार पीडि़त किसान सुकरत दास सोनवानी ने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के पास शिकायत दर्ज कराते हुए न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने शिकायत में बताया कि हल्का पटवारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों के साथ सांठगांठ की और किसान के खेत का फर्जी सीमांकन कर दिया। किसान के खेत में जो सरकारी नाला स्थित है, उसे दस्तावेजों में खेत के बीचो-बीच दर्शा दिया गया। इस कागजी हेराफेरी से रसूखदार लोगों को किसान की पुश्तैनी जमीन पर अवैध कब्जा करना आसान हो गया।

बताया गया कि इस पूरे प्रकरण का सबसे चौंकाने वाला पहलू अवैध वसूली से संबंधित है। किसान का आरोप है कि सीमांकन को सही करने के नाम पर उससे पांच हजार रुपये की मांग की गई। मजबूर किसान ने 3,500 रुपये नकद दिए और बाकी 1500 रुपये फोन पे के माध्यम से डिजिटल रूप से ट्रांसफर किए। किसान के पास इस डिजिटल लेनदेन का पक्का सबूत मौजूद है, जो भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि करता है। बावजूद इसके जब इस बारे में पूछा गया, तो संबंधित व्यक्ति ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया कि खाते में पैसे आते रहते हैं, मुझे नहीं पता क्यों डाले गए।

खेत में घुसकर किया तांडव और परिवार को दी धमकी :

इधर, गांव के कुछ दबंगों ने कानून को अपने हाथ में ले लिया है। पीडि़त किसान सुकरत दास ने बताया कि गांव की कुछ लोगों ने उसकी गैरमौजूदगी में खेत में घुसकर फेंसिंग तोड़ दी और मेढ़ बंधान को उखाड़ फेंका। बरसात के समय से ही यह सिलसिला जारी है। जब भी किसान विरोध करता है, उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी जाती है। इतना ही नहीं उसे डराने के लिए यह भी कहा जा रहा है कि यदि उसने जमीन नहीं छोड़ी, तो उसे एससी-एसटी एक्ट के झूठे मामले में फंसा दिया जाएगा।

डर के साये में जीने को मजबूर परिवार :

सुकरत दास का पूरा परिवार दहशत में है। जिस जमीन से उनके परिवार का भरण-पोषण होता है, आज उसी जमीन पर जाने से उन्हें रोका जा रहा है। चौकी चाबी और तहसील कार्यालय मोहगांव में कई बार शिकायतें देने के बाद भी स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई। वीडियो फुटेज, टूटी हुई फेंसिंग की तस्वीरें और रिश्वत के डिजिटल सबूत होने के बाद भी पुलिस और प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

इनका कहना है

शिकायत के आधार पर जांच की जाएगी, चौकी चाबी को शिकायत फॉरवर्ड किया गया है, और चौकी प्रभारी को निर्देशित किया गया है कि उचित जांच करे।

रजत सकलेचा, पुलिस अधीक्षक मंडला

मैने किसी प्रकार की पैसे की मांग नहीं की है, मेरे खाते में अनेक तरह के पैसे आते रहते है, मुझे नहीं पता उन्होंने मेरे खाते में क्यों पैसे डाले है मैने कोई पैसे की मांग नहीं की है, ओर मैं फिर से सुकरात का सीमांकन करवा दूंगा। और गांव के लोगों को मैने नहीं बोला था तोडफ़ोड करने के लिए, उन्होंने खुद ही तोडफ़ोड़ किया है।

लाल सिंह उईके, पटवारी

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