नयी दिल्ली, 19 नवंबर (वार्ता) दिल्ली विस्फोट मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उत्तर प्रदेश के कानपुर के हितकारी नगर से हरियाणा में पंजीकृत एक संदिग्ध कार बरामद की है।
एनआईए अधिकारी कार के मालिकाना हक की जांच कर रहे हैं । सूत्रों के अनुसार इस मामले में गिरफ्तार डॉ. शाहीन सईद विस्फोट से लगभग 25 दिन पहले कानपुर गयी थी। पूछताछ में डॉ. शाहीन और उसके सहयोगी मुजम्मिल ने कथित रूप से फरीदाबाद स्थित अल-फ़लाह विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला से बम बनाने के लिए रसायन चुराने की बात स्वीकार की। कई छापों के बाद विश्वविद्यालय पहले ही जांच के दायरे में है।
एक संबंधित घटनाक्रम में, प्रवर्तन निदेशालय ने अल-फलाह समूह के अध्यक्ष जवाद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग की जांच मामले में गिरफ्तार किया। एजेंसी को एक ही पते पर पंजीकृत नौ फर्जी कंपनियों का पता चलने के बाद उसकी 13 दिन की रिमांड मिली है जो सभी एक ही प्रमोटरों से जुड़ी थीं।
इस बीच, एनआईए की व्यापक आतंकवाद-रोधी जांच से पता चला है कि डॉ. उमर नबी कथित रूप से अतिरिक्त आत्मघाती हमलावरों की भर्ती एवं प्रशिक्षण की कोशिश कर रहा था। जांचकर्ताओं ने पाया कि उसने कम से कम 11 व्यक्तियों को प्रेरक वीडियो वितरित किया था, जिनमें से सात कश्मीर से तथा अन्य उत्तर प्रदेश, केरल और कर्नाटक से थे। उन सभी का विश्वविद्यालय से कोई न कोई संबंध था।
एनआईए सूत्रों के अनुसार, उमर का उद्देश्य अकेले काम करने के बजाय एक पूरा आत्मघाती दस्ता तैयार करने का था। फोरेंसिक टीमें उसके अंग्रेजी वीडियो के असामान्य लहजे की जांच कर रही हैं जो कृत्रिम रूप से संशोधित प्रतीत होता है। एजेंसी ने इसका पता लगाने के लिए सैन्य खुफिया और भाषा विशेषज्ञों से सहायता मांगी है।
