दिल्ली डायरी
प्रवेश कुमार मिश्र
बिहार विधानसभा चुनाव में राजग की अप्रत्याशित विजय ने न सिर्फ इंडिया समूह में शामिल दलों के रणनीतिकारों को चौंका दिया बल्कि दिल्ली से बिहार को देख रहे भाजपाई रणनीतिकार भी हैरान रह गए. एकतरफा चुनाव परिणाम को देखकर ज्यादातर राजनेताओं ने हैरानी जताते हुए कहा कि इस तरह के परिणाम का अनुमान प्रचार अभियान के दौरान दोनों पक्षों के भीड़ को देखकर नहीं लगाया जा सकता था.
हालांकि भाजपाई लोगों ने इस परिणाम को कथित जंगलराज की अस्वीकृति और नीतीश-मोदी की जोड़ी के प्रति आम मतदाताओं का विश्वास का प्रतीक माना है वहीं कांग्रेस व राजद के नेताओं ने इसे सुनियोजित रणनीति के तहत मतदाताओं को दिए लोकलुभावन प्रलोभन का परिणाम माना है. चौंकाने वाले परिणाम पर राजनीतिक दलों के अलावा स्वतंत्र राजनीतिक विश्लेषक भी हैरान रहे.
बिखरने लगा लालू परिवार, सामने आई अंतर्कलह
राजद का प्रथम परिवार यानी लालू प्रसाद यादव का परिवार इन दिनों आपसी कलह के कारण सुर्खियों में है. विधानसभा चुनाव के पहले लालू यादव द्वारा अपने बड़े पुत्र तेजप्रताप को उनके व्यक्तिगत निर्णय से आहत होकर परिवार से अलग किया और वे अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़े. चुनाव परिणाम के बाद लालू को अपनी किडनी देकर जीवनदान देने वाली बेटी रोहिणी के साथ तेजस्वी यादव द्वारा की गई बदसलूकी सुर्खियों में है. रोहिणी ने जिस तरह से सार्वजनिक तौर पर परिवार के अंदर के हालात का चित्रण किया है उसको लेकर राजनीतिक जगत के अलावा भी लालू प्रसाद यादव परिवार के अंतर्कलह पर चर्चा होने लगी है. कहा जा रहा है कि क्या लालू परिवार संजय यादव जैसे बाहरी लोगों के कारण बिखराव के कगार पर है?
नीतीश कुमार ने बचा ली अपनी कुर्सी
बिहार विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद भाजपा एक बार फिर नीतीश कुमार की रणनीति के आगे झुकते हुए उन्हें मुख्यमंत्री पद देने पर सहमत होते दिख रही है. दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपाई रणनीतिकार इस बार नीतीश के बजाय भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता के नेतृत्व में बिहार सरकार का गठन कराने के प्रयास में लगे हुए थे. इसके लिए बाकायदा रणनीतिक प्रयास भी किया गया.
चर्चा है कि नीतीश कुमार की सेहत का हवाला देकर भाजपाई वार्ताकारों ने जदयू के सामने कई प्रस्ताव रखकर दबाव बनाने का प्रयास किया. लेकिन सहयोगी दल के दबाव को अनसुना करते हुए नीतीश कुमार ने खुद मोर्चा संभाला और भाजपाई रणनीतिकारों को अपनी शर्तों के आगे झुकने को बाध्य कर दिया है. माना जा रहा है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही भाजपा व अन्य राजग सहयोगी नई सरकार में शामिल होकर भविष्य में बनने वाली परिस्थितियों का इंतजार करेंगे.
हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर
लगातार चुनावी हार के बावजूद कांग्रेसी रणनीतिकार अपनी गलतियों से सबक सीखने के बजाय हार के दूसरे कारणों को आगे करके अपनी रणनीति का बचाव करते दिख रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी मात के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा था कि पार्टी रणनीतिकार अपनी आंतरिक कमियों पर बृहद व पारदर्शी परीक्षण की प्रक्रिया को बढ़ाएंगे लेकिन मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा व दिल्ली हार के बाद जिस तरह से ईवीएम, चुनाव आयोग व भाजपा की लोकलुभावन घोषणा आदि को जिम्मेदार ठहराकर गलतियों से सबक नहीं सीखा गया ठीक उसी तरह बिहार हार पर भी पार्टी के ढुलमुल रवैया ने हैरान कर दिया है.
इस तरह से अपनी कमियों की लगातार अनदेखी के कारण कांग्रेस के अंदर एक बड़े खेमे में नाराजगी दिखाई दे रही है. चर्चा है कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने व्यक्तिगत रूप से पूर्व पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर लगातार हार के सांगठनिक कारणों पर पर्दा डालने की कोशिश करने वाले जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है
