अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में अपने संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देगा भारत: गोयल

नयी दिल्ली, (वार्ता) केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता वार्ता में भारत अपने किसानों, मछुआरों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की रक्षा को अनिवार्य मानता है।
श्री गोयल ने कहा कि व्यापार वार्ता एक निरंतर प्रक्रिया है जिसमें भारत विभिन्न क्षेत्रों में संतुलन बिठाने के साथ अपने संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की रक्षा करेगा। उन्होंने यहां इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों भागीदारी मजबूत हैं तथा रणनीतिक एवं आर्थिक क्षेत्रों में इसका निरंतर विस्तार होता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस भागादीरी में कई तत्व शामिल हैं और इनमें विभिन्न समय पर प्रगति की रफ्तार अलग-अलग हो सकती है।
श्री गोयल ने यह भी कहा कि व्यापार वार्ता एक सतत प्रक्रिया है और भारत को अपने किसानों, मछुआरों, लघु उद्योगों और व्यवसायों की संवेदनशीलता को संतुलित करते हुए अपने हितों की रक्षा करनी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को एक विश्वसनीय साझेदार मानता है और दोनों देश व्यापार एवं वाणिज्य के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध हैं।
वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय सम्बंधों को लेकर चिंता का कोई कारण नहीं है, क्योंकि दोनों देशों की मित्रता लोकतंत्र, विविधता और साझा विकासात्मक सोच के मजबूत स्तंभों पर टिकी है। श्री गोयल ने यह बात ऐसे समय कही है जब अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर अगस्त में शुल्क दो गुना कर 50 प्रतिशत कर दिया है, जिससें अमेरिकी बाजार में भारतीय माल के निर्यात में पिछले दो माह में सालाना आधार पर तेज गिरावट दर्ज की गयी है। भारत और अमेरिका इस समय द्विपक्षीय व्यापार समझौते वार्ता में लगे हुये हैं।
श्री गोयल ने कहा कि भारत 2027 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। श्री गोयल ने मजबूत बैंकिंग प्रणाली, कम मुद्रास्फीति, नियंत्रित राजकोषीय घाटा, बढ़ती उपभोक्ता भावना और जीएसटी सुधारों द्वारा समर्थित अवसरंचना विस्तार को देश के मजबूत आर्थिक बुनियादी कारकों में प्रमुख योगदानकर्ता बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस कथन का उल्लेख भी किया कि भारत न केवल एक उभरता हुआ बाजार है बल्कि विकास का उभरता हुआ मॉडल भी है। इन बुनियादी कारकों में समावेशी और सतत विकास, नागरिकों के कल्याणकारी विकास का मॉडल, एक जीवंत लोकतंत्र और कौशल सम्पन्न एवं प्रतिभाशाली युवाओं के नेतृत्व में भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश की शक्ति शामिल है।

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