ग्वालियर:सालों से बंद पड़ी 120 साल पुरानी देश की सबसे पतली नैरोगेज ट्रेन जल्द एक बार फिर ट्रेक पर दौड़ सकती है। इसे हेरिटेज टूरिस्ट ट्रेन के रूप में घोसिपुरा नैरोगेज स्टेशन से बानमौर गांव स्टेशन के बीच 20 किलोमीटर के ट्रेक पर शुरू करने की तैयारी चल रही है। रेलवे बोर्ड के सर्वे और स्थानीय प्रशासन के साथ सामाजिक लोगो के सुझाव पर अमल करते हुए ये कदम उठाया गया है।
नैरोगेज ट्रेन हर दिन दो फेरे लगाकर 200 किलोमीटर का सफर करती थी। यह ग्वालियर से श्योपुर तक चलती थी। लेकिन मार्च 2020 में कोरोना काल के दौरान इसने आखिरी सफर किया और इसके बाद कभी ट्रैक पर नहीं लौटी। लेकिन लंबे इंतजार के बाद अब एक बार फिर ट्रेन के पटरी पर लौटने की उम्मीद जताई जा रही है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने रेलवे से इसके संचालन की मांग की है।
इस मुद्दे को उठाने वाले वरिष्ठ समाज सेवी सुधीर गुप्ता का कहना है, ‘हाल ही में रेलवे बोर्ड की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हेरिटेज आसीमा मेहरोत्रा और डीडी राजेश कुमार ने ग्वालियर में इस महत्वपूर्ण कदम से जुड़ा सर्वे किया है। इसके बाद संभावनाओं को मजबूती मिली है कि देश की सबसे पतली ग्वालियर की यह नैरोगेज ट्रेन जल्द ही इतिहास की सैर कराएगी, जो घोसीपुरा से बानमोर गांव के बीच चल सकती है।’
‘दो कोच वाली इस ट्रेन को हैरिटेज टूरिस्ट ट्रेन के रूप में चलाने का प्रस्ताव बना है। इसके साथ ही सिंधिया स्टेट टाइम के नैरोगेज म्यूजियम का भी विस्तार नागपुर के नैरोगेज म्यूजियम की तर्ज पर कराया जाए। ताकि यहां पर सिंधिया स्टेट के पुराने रॉयल कोच इंजन को भी डिस्प्ले किया जाए। जिससे यह एक अच्छा पर्यटक स्थल बन सके।’
केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने जताई खुशी
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने साल 2021 में रेल मंत्री को पत्र लिखकर नैरोगेज को नीलाम ना करते हुए हेरिटेज टूरिस्ट ट्रेन की तरह चलने की मांग की थी। पत्र के बाद रेलवे ने इस दिशा में यह काम तेज किया है। केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने रेलवे बोर्ड द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि जल्द ही पर्यटन की दृष्टि से यह सकारात्मक कदम उभर कर आएगा
