जबलपुर: सडक़ों में घूमने वाले आवारा जानवरों के मामले में सरकार द्वारा बनाये गये नियमों का पालन किस तरह हो रहा है, इसकों लेकर सरकार की ओर से जवाब के लिये मोहलत चाही गई। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष शासन की ओर से कहा गया कि गौशालाओं और नपा अधिकारियों से आकड़े एकत्रित किये जा रहे, जिन्हें पेश करने उन्हें कुछ मोहलत दी जाये। जिस पर न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को निर्धारित करते हुए उससे पूर्व विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिये है।
उल्लेखनीय है कि यह जनहित का मामला जबलपुर गोकलपुर निवासी बृजेन्द्र लक्ष्मी यादव सहित अन्य की ओर से दायर किया गया था। जिसमें न्यायालय ने पूर्व में जानना चाहा था कि प्रदेश के भोपाल, इन्दौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन सहित अन्य जिला मुख्यालयों की सडक़ों पर घूमने वाले आवारा जानवरों को लेकर क्या नीति है। यदि मवेशियों को जानबूझकर खुला छोड़ा जाता है तो क्या उसके मालिक पर जुर्माना लगाया जायेगा। जिस पर न्यायालय ने सरकार को ठोस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिये थे।
