सहस्रबुद्धे की सलाह, विश्वविद्यालयों के निदेशक, कुलपति और प्राचार्यों के चयन में हो एआई का इस्तेमाल

नयी दिल्ली, 14 नवंबर (वार्ता) राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद् (नैक) के अध्यक्ष अनिल सहस्रबुद्धे ने विश्वविद्यालयों के निदेशक, कुलपति और प्राचार्यों के चयन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल का समर्थन किया है।
श्री सहस्रबुद्धे ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में शिक्षा में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में संचालन से लेकर छात्रों की परीक्षा और उनके मूल्यांकन तथा सही इनटर्नशिप के चयन में भी एआई का इस्तेमाल हो सकता है। उन्होंने कहा, “शिक्षा क्षेत्र में एआई का उपयोग फैकल्टी के चयन में हो, कुलपति के चयन में हो, पृष्ठभूमि की जांच करने के लिए हो। पाठ्यक्रम को अद्यतन रखने के लिए उसका इस्तेमाल हो सकता है। अध्ययन-अध्यापन के तौर-तरीकों में उसका इस्तेमाल हो सकता है। छात्रों को व्यावहारिक अनुभव देने के लिए इनटर्नशिप में भी एआई का उपयोग हो सकता है। एआई का उपयोग रिसर्च के लिए भी हो सकता है।”
उन्होंने कहा कि एआई के इस्तेमाल से कंपनियों को लिए यह तय करना आसान हो जाता है कि वे किन छात्रों को इनटर्नशिप पर रखना चाहते हैं। इसी प्रकार छात्रों के लिए भी अपनी रुचि के क्षेत्र में इनटर्नशिप के लिए सही कंपनी चुनना आसान होगा। श्री सहस्रबुद्धे ने कहा कि एआई से आइडिया लेकर उनमें सुधार करके उद्यमिता और स्टार्टअप को आगे बढ़ाया जा सकता है।
विश्वविद्यालयों द्वारा विभिन्न नियामकों को दिये जाने वाले डाटा का एक बैंक तैयार करने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि इससे विश्वविद्यालय प्रशासन को एक ही काम बार-बार करने की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि अलग-अलग नियामकों को दिये जाने वाले 80 प्रतिशत डाटा सर्वनिष्ठ होते हैं यानी सबको दिये जाते हैं। इसलिए एक जगह सभी डाटा होने से नियामकों के लिए वहां से डाटा लेना आसान हो जायेगा और उसकी प्रामाणिकता भी बढ़ जायेगी।
इस सम्मेलन का आयोजन भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) और केसी ग्लोबेड द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।
शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए दक्षिण एशिया में ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि जॉज थिवेयोस ने बताया कि कैसे अपनी पसंद के अनुरूप भारतीय फिल्मों और संगीत के चयन के लिए एआई का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि एआई हमारे भविष्य का अभिन्न अंग है और इसे अंगीकार किया जाना चाहिये। यह कौशल को आगे बढ़ाने में प्रेरक का काम करता है। छात्रों को उद्योग की जरूरत के हिसाब से प्रशिक्षित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि एआई उद्योग को नया स्वरूप दे रहा है और नये तरह के रोजगार पैदा कर रहा है। यह काम की प्रकृति को भी बदल रहा है

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