कैनबरा, (वार्ता) ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय विज्ञान एजेंसी ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने ऑडियो डीपफेक का पता लगाने का एक बेहतर तरीका खोज निकाला है। यह तरीका पहले से अधिक सटीक, उपयुक्त और बदलते खतरों के साथ तालमेल बिठाने में सक्षम है।
कॉमनवेल्थ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (सीएसआईआरओ) के अनुसार यह नई तकनीक रिहर्सल विद ऑक्जिलरी-इंफॉर्म्ड सैंपलिंग (आरएआईएस), ऑडियो डीपफेक का पता लगाने के लिए डिजाइन की गई है, जो साइबर अपराध के जोखिमों में एक बढ़ता हुआ खतरा है।
आरएआईएस यह निर्धारित करता है कि कोई ऑडियो क्लिप असली है या कृत्रिम रूप से बनाई गई है। यह हमले के प्रकार बदलने के साथ-साथ समय के साथ अपनी कार्यक्षमता बनाए रखता है।
विज्ञान एजेंसी की डेटा और डिजिटल विशेषज्ञ शाखा सीएसआईआरओ की सह-लेखिका क्रिस्टन मूर ने कहा, “आरएआईएस पिछले उदाहरणों के एक छोटे लेकिन विविध सेट को चुनकर और संग्रहीत करके इस समस्या का समाधान करता है, जिसमें छिपे हुए ऑडियो लक्षण भी शामिल हैं।” विज्ञप्ति में कहा गया है कि आरएआईएस एक स्मार्ट चयन प्रक्रिया का उपयोग करता है जो प्रत्येक ऑडियो नमूने के लिए अतिरिक्त ‘सहायक लेबल’ उत्पन्न करता है, जिससे ऑडियो नमूनों के एक विविध और प्रतिनिधि सेट की पहचान करने में मदद मिलती है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह नई तकनीक, परीक्षण की गई विधियों में सबसे कम त्रुटि दर प्राप्त करती है। यह विधि सीएसआईआरओ फेडरेशन यूनिवर्सिटी ऑस्ट्रेलिया और आरएमआईटी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित की गई है।
