ब्यावरा:फसलों को जंगली जानवरों से बचाने ऊंचाई तक जाली लगाकर या तार फेंसिंग कर खेतो को कवर्ड किया जा रहा है, यही नहीं फसल बचाने रात-रात भर जागकर पहरेदारी करना पड़ रहा है. जंगली जानवरों के झुंड के झुंड आते है और फसलों को चट करते हुए रौंद देते है, इससे काफी नुकसान पहुंच रहा है.गौरतलब है कि जिले के मलावर, सुठालिया, ब्यावरा, नरसिंहगढ़ सहित अन्य क्षेत्र में खेतों में खड़ी फसलों पर जंगली जानवरों का जबर्दस्त कहर है. जानवर खेतों में घुसकर फसलों को खाकर नष्ट कर रौंद रहे है. ग्रामीणों को दिन और रात्रि में जागकर पहरेदारी कर फसलों को बचाना पड़ रहा है.
जाली तक तोड़ देते जानवर
कई खेतों में पांच से छ: फीट की ऊंचाई तक जाली या फिर तार फेंसिंग कराई गई है. ग्रामीणों के अनुसार जंगली सुअर जाली तक को तहस-नहस कर खेतों में घुसकर फसल नष्ट कर रहे हैै.उल्लेखनीय है कि रबि सीजन में बोवनी के बाद खेतो फसलें लहलहाने लगी है. किसानों के समक्ष सबसे बड़ी समस्या फसल को जंगली जानवरों से बचाने की है. मलावर क्षेत्र के ग्राम शमशेरपुरा, मोरीखो, भाटपुरा, देवखेड़ी, जामुनिया, खजूरखाड़ी, तवडिया, भाटपुरा, गुंजारी, सुठालिया तथा ब्यावरा तहसील के बारवां, खजुरिया, मोर्चाखेड़ी, बरखेड़ी, बूड़ाखेड़ा सहित ग्रामीण क्षेत्र में जंगली जानवरों के द्वारा फसले तबाह की जा रही है.
मिट्टी तक खोद देते है
खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही जंगली सुअर खेतों की मिटटी तक खोद देते है. फसल सहित मिट्टी को उखाड़ देने से काफी नुकसान होता है. जानवरों के झुंड फसल को खाने के साथ ही रौंद कर उसे नष्ट कर देते है.
इस तरह होता है नुकसान का आंकलन
जंगली जानवरों के द्वारा फसलों को क्षति पहुंचाई जाती है तो इसकी शिकायत पर राजस्व का अमला क्षति का आंकलन करता है. इसमें वन विभाग के कर्मचारी भी वेरिफिकेशन के लिए साथ रहता है. समूची प्रक्रिया के बाद नुकसान का मुआवजा राजस्व विभाग के माध्यम से करना बताया जाता है
