ग्वालियर। जिस प्रकार बिना नौका के समुद्र पार नहीं किया जा सकता है, उसी प्रकार संसार रूपी समुद्र को रामकथा रूपी नौका ही पार करा सकती है। यह विचार माधवाचार्य महाराज ने शुक्रवार को उपाध्याय नर्सिंग होम के पीछे, न्यू जवाहर कॉलोनी में आयोजित रामकथा के तीन दिन व्यक्त किए। इस अवसर पर शिव पार्वती विवाह की झांकी भी सजाई गई। कथा वाचक माधवाचार्य ने बताया कि भगवान शंकर ने समुद्र मंथन से निकला जहर राम नाम का आश्रय लेकर ही पिया। राम नाम लेकर कठिन से कठिन कार्य भी आसानी से हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि तप करने से ही लक्ष्य की प्राप्ति होती है। जब लक्ष्य बड़ा हो तो पुरुषार्थ की परिधित बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि माता पार्वती जब बड़ी हो जाती है, तो पर्वतराज को उनकी शादी की चिंता सताने लगी तो एक दिन पर्वतराज के घर देवर्षि नारद आए और उन्होंने भगवान भोलेनाथ के साथ पार्वती के विवाह का संयोग बताया। इसके बाद विवाह तय हुआ और बारात लेकर शिवजी पार्वती के यहां गए। नंदी पर सवार भोलेनाथ जब भूत-पिशाचों के साथ बारात लेकर पहुंचे तो उसके देखकर पर्वतराज और उनके परिजन अचंभित रह गए, लेकिन माता पर्वती ने खुशी से भोलेनाथ को पति के रूप में स्वीकार कर लिया। इस मौके पर रमेश अग्रवाल, कारेलाल सिंह राजावत, डॉ. जितेंद्र सिंह राजावत, राकेश गुप्ता, बृजबिहारी वाजपेई, डॉ. केपी सिंह चौहान, आचार्य सत्येंद्र गुरुजी, शिवेंद्र सिंह राठौड़, रामनरेश सिंह भदौरिय, अवध बिहारी वाजपेई, राजेश, ब्रह्मानंद शर्मा, नंदकिशोर बौहरे, रामसिंह, राजेंद्र गुरले, आरके शर्मा, सुरेश शर्मा आदि श्रोता मौजूद रहे।
