ईडी ने धन शोधन मामले में क्रिकेटर रैना और धवन की 11.14 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की

नयी दिल्ली, 06 नवंबर (वार्ता) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरूवार को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत पूर्व भारतीय क्रिकेटरों सुरेश रैना और शिखर धवन की 11.14 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति कुर्क की।
कुर्की में सुरेश रैना के नाम पर 6.64 करोड़ रुपये मूल्य के म्यूचुअल फंड निवेश और शिखर धवन के नाम पर 4.5 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्ति शामिल है।
ईडी ने यहां जारी एक बयान में दोनों क्रिकटरों की चल और अचल संपति की कुर्की की पुष्टि करते हुए कहा कि उसकी जाँच विभिन्न राज्य पुलिस एजेंसियों द्वारा अवैध अवैध विदेशी सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म 1xबीईटी के खिलाफ दर्ज की गयी कई प्राथमिकियों पर आधारित है।
गौरतलब है कि 1xबीईटी एक ऑनलाइन जुआ कंपनी है। कंपनी की स्थापना 2007 में हुई थी और इसका मुख्यालय साइप्रस में है।
ईडी की जाँच से पता चला है कि 1xबीईटी और उसके सरोगेट ब्रांड 1xबीएटी और 1xबीएटी स्पोर्टिंग लाइन्स ने पूरे भारत में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए के संचालन को बढ़ावा दिया ।
एजेंसी की जाँच से पुष्टि हुई कि दोनों क्रिकेटरों ने जानबूझकर 1xबीईटी के प्रतिनिधियों के माध्यम से उसे बढ़ावा देने के लिए विदेशी संस्थाओं के साथ विज्ञापन समझौते किए। ये विज्ञापन, अवैध सट्टेबाजी गतिविधियों से होने वाली आय, धन के अवैध स्रोत को छिपाने के लिए विदेशी संस्थाओं के माध्यम से भुगतान के बदले में किए गए थे। जाँच में पता चला कि 1xबीईटी भारत में बिना अनुमति के काम कर रहा था और सोशल मीडिया, ऑनलाइन वीडियो और प्रिंट मीडिया के माध्यम से भारतीय उपयोगकर्ताओं को लक्षित करने के लिए सरोगेट ब्रांडिंग और विज्ञापनों का उपयोग कर रहा था।
ईडी की जाँच में 1000 करोड़ रुपये से अधिक की धन शोधन का पता चला है। 1xबीईटी ने विभिन्न “म्यूल खातों “के माध्यम से धन एकत्र कर भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए सट्टेबाजी की सुविधा प्रदान की और ऐसे 6000 से अधिक खातों की पहचान की गई है। म्यूल खाता एक बैंक खाता होता है जिसका इस्तेमाल अपराधी अवैध धन को सफेद करने के लिए करते हैं। ये खाते अक्सर अनजान व्यक्तियों द्वारा आसानी से पैसा कमाने के लालच में या जबरन इसमें शामिल होने के लिए खोले जाते हैं।
एजेंसी की जांच में यह भी पाया गया है कि उपयोगकर्ताओं से एकत्रित राशि में कई भुगतान गेटवे का इस्तेमाल किया जाता था। इसमें 1000 करोड़ रुपये से अधिक राशि के धन शोधन का संकेत मिला है। पीएमएलए के तहत तलाशी अभियान के बाद ईडी ने चार भुगतान गेटवे पर छापेमारी की जिसके परिणामस्वरूप आपत्तिजनक साक्ष्य जब्त किए गए। इन भुगतान गेटवे से जुड़े 60 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है जिनमें अब तक चार करोड़ रुपये से अधिक की राशि फ्रीज की गई है।
इस तरह के बढ़ते मामलों में ईडी ने एक सार्वजनिक परामर्श जारी किया है जिसमें कहा गया है कि जानबूझकर ऐसी गतिविधियों में सहायता करने वाले किसी भी व्यक्ति पर पीएमएलए के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। इसमें सात साल तक की कैद और संपत्ति कुर्क हो सकती है। यदि नागरिकों को खाते के दुरुपयोग का संदेह हो, तो उन्हें तुरंत अपने बैंक और स्थानीय पुलिस को सूचित करना चाहिए।

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