सीहोर। कलेक्टर बालागुरू के. की अध्यक्षता में जल उपयोगिता समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले में सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और जल संरक्षण की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई.
कलेक्टर ने कहा कि नहर के अंतिम छोर के किसान के खेत तक पानी पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए. जल वितरण इस प्रकार किया जाए कि हर किसान के खेत तक सिंचाई का पानी समान रूप से पहुंचे और कोई क्षेत्र असिंचित न रहे. जल वितरण व्यवस्था पारदर्शी, नियंत्रित और समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि किसानों को फसल उत्पादन में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े.
उन्होंने कहा कि जिले में पेयजल के लिए पानी का प्रबंधन सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में किया जाए. ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल स्रोतों की नियमित निगरानी, मरम्मत एवं रखरखाव सुनिश्चित किया जाए, ताकि जिले के किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट की स्थिति न बने. बैठक में जानकारी दी गई कि जिले में जल संसाधन संभाग के अधीन 04 मध्यम परियोजना (दोराहा विकासखंड सीहोर, रामपुरा खुर्द विकासखण्ड आष्टा, बनेटा मध्यम उद्वहन सिंचाई योजना विकासखण्ड बुधनी एवं घोघरा परियोजना विकासखंड भैरूंदा), 66 लघु सिंचाई तालाब, 10 लघु उद्वहन सिंचाई योजना, 01 नहर तथा 223 स्टापडेम/बैराज निर्मित हैं। इस प्रकार जिले में कुल 289 सिंचाई योजनायें निर्मित हैं, जिनकी कुल उपयोगी जल भण्डारण क्षमता 230.11 मि.घ.मी. है। इसमे से 13 अक्टूबर 2025 की स्थिति में 206.19 मिघमी जल संग्रहण हुआ है, जो 89.60 प्रतिशत है.
जिले में 3 मध्यम परियोजना, 01 मध्यम उद्वहन सिंचाई योजना, 66 लघु सिंचाई तालाब, 10 लघु उद्वहन सिंचाई योजना, 01 नहर तथा 223 बैराजों से सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही है। इस प्रकार कुल 289 सिंचाई योजनाओं से सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही है.
