भारी-भरकम बिजली बिलों के विरोध में प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा

इंदौर:बिजली विभाग के कंपनी बनने, टीओडी सिस्टम और स्मार्ट मीटर लगने के बाद आ रहे भारी-भरकम बिल को लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है. इसके विरोध में प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन हो चुके हंै. लेकिन न तो बिजली कंपनी और न ही सरकार इस ओर ध्यान दे रही है. इंदौर शहर के आक्रोशित उपभोक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कमिश्नर कार्यालय के समक्ष में विरोध प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन सौंपा तथा इस समस्या से निजात दिलाने की मांग की है.

टीओडी सिस्टम एवं स्मार्ट मीटर लगने के बाद हजारों रुपए के बिल उपभोक्ताओं को थमाए जा रहे हैं. यह समस्या शहर के हर क्षेत्र से सामने आ रही है. ज्ञात हो कि बिजली कानून वर्ष 2003 के अनुसार स्मार्ट मीटर लगवाना न लगवाना उपभोक्ता पर निर्भर करता है, लेकिन देखने में आ रहा है कि विद्युत कर्मी कानून का डर दिखाते हुए उपभोक्ताओं के घरों में जबरन स्मार्ट मीटर लगा रहे हैं. यदि इसका विरोध किया जाता है तो विद्युतकर्मियों द्वारा पुलिस को भी बुलवा लिया जाता है. यह पीड़ा एक-दो उपभोक्ताओं की नहीं, बल्कि लाखों उपभोक्ताओं की है.

यहां तक कि कच्चे मकान और एक बत्ती का बिल भी 10 से 50 हजार रुपए गरीबों को थमाया जा रहा है. भुगतान नहीं करने पर कनेक्शन ऑटोमेटिक काट दिया जाता है. स्मार्ट मीटर के विरोध में शहर के अनेक उपभोक्ताओं ने बिजली उपभोक्ता ऐसोसिएशन एवं राज्य संयोजन कमेटी के साथ हाथों में तख्तियां लेकर कमिश्नर कार्यालय पर प्रदर्शन कर नारेबाजी की और विरोध दर्ज कराते हुए ज्ञापन सौंपा. प्रदर्शन में रामस्वरूप मंत्री, प्रमोद नामदेव, सोनू शर्मा, मान्या सिंह, दीक्षा यादव, नेहा कुल्हारे, पूजा खन्ना सहित बड़ी संख्या में उपभोक्ता शामिल थे.

यह बोले आंदोलनकारी
टीओडी सिस्टम में अलग-अलग समय के रेट लगाए जाते हैं, अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से बड़े-बड़े उद्योगों, फैक्टि्रयों और प्लांट में चोरी होती है, जिसकी भरपाई गरीबों के बिल अनाप-शनाप देकर वसूली की जा रही है. सरकार संज्ञान में लाने के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है.
– पुष्पेंद्र राजपूत, सामाजिक कार्यकर्ता

देश में आम जनता की सेवा से जुड़े सरकारी विभागों का लगातार निजीकरण हो रहा है. निजीकरण वहां नहीं होना चाहिए, जहां आम लोगों को देने वाली सेवाएं हैं. हमने मजदूर वर्ग के क्षेत्रों में जाकर देखा कि जिनके यहां खाने की मौहताजी है, उनके बिल 10 से 50 हजार रुपए के आ रहे हंै.
– अर्शी खान, समाजसेवी

उपभोक्ताओं को भारी बिल थमाए जा रहे हैं. बिजली कंपनी के अधिकारी मीटर की मिस्टेक मान नहीं रहे हैं, प्रशसान भी सुनने को तैयार नहीं है. इससे साफ प्रतीत होता है कि स्मार्ट मीटरों के लिए करोड़ों का कमीशन बांटा गया है. हम बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे.
– राहुल निहोरे, सामाजिक कार्यकर्ता

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