मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास
भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी गठन के बाद अब मालवा-निमाड़ में संभावित मंत्री मंडल विस्तार पर नेताओं की नजर टिकी है. बिहार चुनाव पश्चात मोहन सरकार का मंत्री मंडल फेरबदल व विस्तार होने की चर्चा है. विगत कुछ माहों में कुछ मंत्री अपने बड़बोलेपन के कारण विपक्षियों के निशाने पर रहे. संघ की भी इन नेताओं पर निगाह बनी हुई है. हो सकता है आने वाले समय में विवादास्पद मंत्रियों की घर वापसी कर दी जाए या महत्वपूर्ण मंत्रालय छीन लिया जाए. ऐसे में नए मंत्री के लिए देवास का नंबर लग सकता है. मालवा जिसमें इंदौर देवास उज्जैन रतलाम शाजापुर जिला शामिल है, उज्जैन से मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं आते हैं इसलिए उज्जैन जिले से किसी के मंत्री बनने की संभावना बहुत कम है.
इंदौर जिले से तुलसी सिलावट एवं कैलाश विजयवर्गीय पूर्व से ही कद्दावर पद पर बने हुए हैं. अब निगाह टिकती है देवास जिले पर. देवास जिले में आशीष शर्मा लगातार तीसरी बार जीतकर संगठन की निगाह में स्वच्छ छवि वाले नेता बने हैं. बागली विधायक मुरली भंवरा भी पहले ही कार्यकाल में शिक्षा बोर्ड समिति में शामिल कर लिए गए हैं. देवास की बात आती है तो राज परिवार कुछ वर्ष कानूनी विवादों में उलझ गया था तभी से संगठन भी नहीं चाहता था उन्हें कोई ऊंचा पद देना. परिस्थितिया बदलने के साथ अब देवास को मंत्री पद मिलने की उम्मीद बंधी है. चर्चा में इसके लिए आशीष शर्मा, गायत्री राजे पवार के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं.
राजनीतिक दल गुटबाजी को लेकर बेबस
अंचल में इंदौर के बाद बुरहानपुर ऐसा जिला है जहां दोनों मुख्य राजनीतिक दल गुटबाजी को लेकर बेबस हैं. यहां भाजपा और कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं, इसी के साथ गुटबाजी का विस्तार और आक्रामकता बढ़ गई है. नतीजा यह है कि पार्टी के एजेंडे और अभियानों से कई पुराने नेताओं द्वारा दूरियां बनाई जाने लगी है. कांग्रेस में जिलाध्यक्ष रिंकू टॉक, पूर्व विधायक ठाकुर सुरेंद्रसिंह शेरा भैया , पूर्व अध्यक्ष अजयसिंह रघुवंशी, नवनियुक्त कांग्रेस अध्यक्ष रविंद्र महाजन गुटों में लाख कोशिशों के बावजूद पटरी नहीं बैठ रही.
इससे यहां कांग्रेस दिशाहीन नजर आ रही है. भाजपा का भी यही हाल है, परंतु अनुशासन की तलवार तले नेता कम से कम पार्टी के विशेष कार्यक्रमों में सभी एक साथ शिरकत करते रहे हैं. अन्यथा भाजपा में सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, नेपा विधायक मंजू दादू, पूर्व मंत्री व प्रदेश भाजपा प्रवक्ता विधायक श्रीमती अर्चना चिटनिस गुट का अपनी ढपली अपना राग अक्सर दिखाई देता है. इन दिनों चिटनीस-दादू में जोरदार खींचतान चल रही है. मामला विधान सभा क्षेत्र को लेकर है. नेपा विधायक मंजू दादू द्वारा बुरहानपुर विधानसभा क्षेत्र के मामलों को विधानसभा में उठाने और अधिकारियों की शिकायत से अर्चना चिटनीस नाराज बताई जा रही हैं.
क्या करेगी अनुशासन समिति
तराना विधायक महेश परमार को बिना उनके दावा किए जिला अध्यक्ष बना दिया गया. उज्जैन ग्रामीण अध्यक्ष घोषणा से नाराज कांग्रेस के एक गुट द्वारा नगर में आयोजित सचिन पायलट की किसान न्याय यात्रा का बहिष्कार कर अपनी अलग रैली निकालने से सामानान्तर कांग्रेस चलाने के आरोप में 50 से अधिक कार्यकर्ताओं पर अनुशासन भंग कार्रवाई का अंदेशा बना हुआ है. प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति ने उज्जैन के 50 कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा था, जिसकी मियाद खत्म हो चुकी है.
उल्लेखनीय है कि 12 सितंबर को आंदोलन में प्रदेश कांग्रेस सचिव हेमंत सिह चौहान ने अलग रैली निकाली थी. इस रैली में कांग्रेस से विधायक पद के प्रत्याशी रहे विक्की यादव, चेतन यादव, माया राजेश त्रिवेदी, पूर्व विधायक मुरली मोरवाल, राजेश बाथली सहित दर्जनों नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए थे. अब देखते हैं कि अनुशासन समिति इतने सारे कार्यकर्ताओं के खिलाफ कोई एक्शन लेती है या मामला ठंडे बस्ते में डालती है.
