इंदौर: सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार किस तरह अपनी जड़ें जमा चुका है, इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि बीते10 माह की अवधि में लोकायुक्त पुलिस ने अलग-अलग विभागों में कार्रवाई करते हुए 42 अफसरों और कर्मचारियों को रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा है. वहीं, आरोपियों से 8 लाख 93 हजार 850 की रिश्वत राशि जप्त की गई है. इसमें तीन आरोपियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपए की अनुपातहीन संपत्ति का भी खुलासा किया गया है. इनमें एक सेवानिवृत्त अधिकारी के पास सबसे अधिक संपत्ति मिली है. इसके अलावा पांच ऐसे मामलों में भी कार्रवाई की गई है, जिनमें अफसरों ने अपने पद का दुरुपयोग कर भारी भ्रष्टाचार किया.
सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए लोकायुक्त पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है. लोकायुक्त एएसपी राजेश सहाय ने बताया कि जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच की गई कार्रवाइयों में 8 लाख 93 हजार 850 रुपए रिश्वत की राशि जप्त की गई. इनमें शिक्षा, राजस्व, वन, विद्युत, नगर निगम, पुलिस और आबकारी जैसे विभागों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं. लोकायुक्त टीम ने अपनी कार्रवाई में उन अफसरों को भी बेनकाब किया, जो लंबे समय से प्रभाव का कवच पहनकर बचते आ रहे थे. इनमें हाल ही में हुए तीन बड़े छापे सबसे चर्चित रहे. राजेश सहाय का कहना है कि सरकारी विभागों में पद का दुरुपयोग और रिश्वतखोरी करने वालों पर कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बनी रहे.
हर विभाग में फंसे भ्रष्ट अफसर
लोकायुक्त की कार्रवाइयों में इस साल सबसे ज्यादा मामले शिक्षा, वन, राजस्व और पुलिस विभागों से सामने आए. कई मामलों में छोटे कर्मचारियों से लेकर वरिष्ठ अफसर तक को रिश्वत लेते पकड़ा. इनमें कुछ अफसरों ने मामूली रकम लेकर सरकारी कामों में मनमानी की, तो कुछ ने पद का दुरुपयोग कर करोड़ों की संपत्ति अर्जित की.
पद के दुरुपयोग के 5 मामले दर्ज
लोकायुक्त ने बीते महीनों में पांच ऐसे मामलों की जांच भी शुरू की है, जिनमें अफसरों ने अपने पद का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया. इन सभी के खिलाफ विभागीय जांच जारी है. जांच पूर्ण होने पर मुकदमा दायर किए जाने की तैयारी है.
