जबलपुर: नगर निगम जबलपुर में ऐसा कई बार देखा जा चुका है कि निगम कर्मचारी नौकरी पर आते ही नहीं थे और ठेकेदारों द्वारा उनका नगर निगम से वेतन भी बकायदा निकलता रहा है। ऐसे ठेकेदारों के खिलाफ अब निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने सख्त रूख अपना लिया है और सभी से ये जानकारी मांगी है कि उनके अंडर में कितने कर्मचारी किस विभाग के तहत काम कर रहे हैं। लिहाजा निगमायुक्त के इस फरमान से ठेकेदारों व इनसे मिलीभगत करने वाले अधिकारियों के खेमे में हड़कंप मचा हुआ है।
इन सभी को भय सता रहा है कि अगर पूरी जानकारी सही-सही दे दी गई तो कहीं उनका काला-चिट्ठा निगमायुक्त के सामने न आ जाए और पूरा खेल मटिया-मेट हो जाए। जानकारी के अनुसार निगमायुक्त के इस प्रयास से ये भी स्पष्ट हो जाएगा कि कितने कर्मचारी फील्ड पर हैं और कितने ड्यूटी से गायब हैं। उधर निगमायुक्त के सख्त रूख को लेकर निगम के उन कर्मचारियों के बीच खुशी व्याप्त है जो रोज ईमानदारी से अपने दायित्व का निर्वहन कर रहे थे।
इनका कहना है
नगर निगम में जो नियमित अधिकारी-कर्मचारी हैं उनकी हाजिरी भी ऑनलाइन ही लग रही है और इनका पूरा डाटा नगर निगम के पास है, लेकिन ठेका पर आधारित कितने कर्मचारी किस ठेकेदार के अंडर काम कर रहे हैं और नगर निगम से भुगतान ठेकेदार के जरिए ले रहे हैं, इसकी जानकारी ठेकेदारों से तलब की गई है, लेकिन ठेकेदारों ने जानकारी अभी तक नहीं दी है। आज शाम को रिव्यू बैठक रखी गई है जिसमें फिर से ठेकेदारों से जानकारी ली जाएगी। यदि इसमें लापरवाही की जाती है तो नवंबर माह से वेतन कटौती की जाएगी और जितने कर्मचारियों की सूची फिलहाल नगर निगम के पास है उन्हीं को बस निगम का ठेका कर्मी माना जाएगा।
रामप्रकाश अहिरवार, निगमायुक्त
