नई दिल्ली: रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही देशभर में किसान आलू की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं। आलू एक लाभदायक नगदी फसल है, लेकिन बदलते मौसम, रोगों और कीटों के प्रकोप से इसकी पैदावार और गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है। धानुका एग्रीटेक ने किसानों को स्वस्थ और लाभदायक फसल सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक फसल प्रबंधन और संरक्षण पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी है।
सही बुवाई से मिलेगी मजबूत फसल
किसानों को हमेशा प्रमाणित और रोगमुक्त बीज कंदों का ही उपयोग करना चाहिए। मध्यम आकार के स्वस्थ कंद अंकुरण के लिए बेहतर होते हैं। बुवाई का उपयुक्त समय अक्टूबर मध्य से नवंबर मध्य तक है। भूमि भुरभुरी, जल निकासी युक्त और जैविक पदार्थों से भरपूर होनी चाहिए। पौधों के बीच 20–25 सेंटीमीटर और कतारों के बीच 60 सेंटीमीटर की दूरी रखें ताकि पर्याप्त वायु संचार हो सके।
रोगों से बचाव के उपाय
बीज उपचार से ही फसल को प्रारंभिक रोगों जैसे ब्लैक स्कर्फ और स्कैब से बचाया जा सकता है। आलू की सबसे बड़ी समस्या अर्ली और लेट ब्लाइट है, जो नमी और ठंडे मौसम में तेजी से फैलती है। रोकथाम के लिए अंकुरण के तुरंत बाद कवकनाशी का छिड़काव करें और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार इसे दोहराएं।
Thiophenate methyl 38% + Kasugamycin 2.21% बीज उपचार के लिए, जबकि Amisulbrom 20% SC, Mancozeb 75% WP और Carbendazim 12% + Mancozeb 63% WP पत्तियों पर छिड़काव के लिए अत्यंत प्रभावी हैं। Amisulbrom लेट ब्लाइट से मजबूत सुरक्षा देता है, Mancozeb व्यापक स्पेक्ट्रम कवकनाशी के रूप में कार्य करता है, और Carbendazim-Mancozeb मिश्रण बीज और मिट्टी जनित रोगों पर नियंत्रण रखता है।
नमी और पोषण प्रबंधन
समान नमी बनाए रखना अत्यंत जरूरी है। जलभराव से बचें और स्प्रिंकलर या ड्रिप सिंचाई अपनाएं। नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग करें। मायकोराइजा जैसे जैव उर्वरक नमी और पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाने में मदद करते हैं।
स्मार्ट और सुरक्षित खेती की दिशा में कदम
धानुका एग्रीटेक के उन्नत फसल सुरक्षा उत्पाद पर्यावरण अनुकूल कवकनाशी, कीटनाशी और बायोस्टिमुलेंट्स किसानों को फसल को रोग व कीटों से बचाने में सक्षम बनाते हैं। सही बुवाई, समय पर सुरक्षा और वैज्ञानिक तरीकों के उपयोग से किसान इस सीजन में अपनी आलू फसल से अधिक उत्पादन और बेहतर आमदनी सुनिश्चित कर सकते हैं।
