उज्जैन: मोक्षदायिनी मां शिप्रा के तट पर होने वाले विश्व प्रसिद्ध सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियां अभी से जोर पकड़ने लगी हैं. खास बात यह है कि इन तैयारियों में सिंहस्थ महापर्व 2016 में प्रकाशित एक विशेष पुस्तक/शासकीय प्रतिवेदन को ‘गाइडलाइन’ के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है.उज्जैन में हाल ही में आए कई नए अधिकारियों को इस किताब का गहन अध्ययन करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वे 2028 के विशाल आयोजन को सफलतापूर्वक अंजाम दे सके.
2016 की किताब में पूरा सिंहस्थ
बीते सिंहस्थ विक्रम संवत 2073 में प्रकाशित इस किताब में 2016 के सिंहस्थ महाकुंभ से जुड़ी प्रस्तावना से लेकर पूरे आयोजन की गतिविधियों, योजनाओं और निर्माण कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई है. तात्कालिक अधिकारियों ने क्या-क्या तैयारी की थी किस प्रकार से मेला क्षेत्र तक सुविधाएं जुटाई गई थी इसका उल्लेख किया गया है.
किताब में सिंहस्थ मेला प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष दिवाकर नातू सहित तमाम पूर्व अधिकारियों के संदेश भी प्रकाशित हैं. पूर्व कलेक्टर से लेकर पूर्व संभाग आयुक्त और पूर्ण निगम आयुक्त से लेकर पूर्व आईजी जी पूर्व एसपी तक के संस्मरण किताब में उपलब्ध है.
5 करोड़ आए थे अब 30 करोड़ आएंगे
यह प्रतिवेदन अधिकारियों को बता रहा है कि 2016 में उज्जैन आए 5 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए क्या-क्या मूलभूत सुविधाएं जुटाई गई थीं, जिसमें सरकारी एजेंसियों के स्थाई और अस्थाई कर्मचारियों के कार्ड बनाने, साधु-संतों और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय समिति बनाने जैसे रोचक तथ्य भी शामिल हैं. अब आगामी सिंहस्थ 2028 में 30 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आएंगे उसी की तैयारी में मध्य प्रदेश सरकार और उज्जैन जिला प्रशासन जुटा है.
