छतरपुर। जिले के गौरिहार तहसील के गहबरा गांव में एक ऐसा पवित्र स्थान है, जहां आज भी लोग न्याय पाने के लिए सीधे आते हैं। लोकमान्यता है कि इस गांव की रक्षा और अन्याय के निवारण का कार्य ग्राम देवता ही करते हैं। सिर्फ गांव के लोग ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से भी लोग न्याय की आस में यहां आते हैं।
गांववासी दयाराम दुबे बताते हैं कि ये ग्राम देवता उनके ही पूर्वज बधई बाबा हैं। लगभग 400 साल पहले, जब गांव में अत्याचार और अन्याय बढ़ गया था, तब बधई बाबा ने जिंदा रहते हुए अपने शरीर को दो हिस्सों में काट लिया। इसके बाद स्वप्न आया कि उन्होंने “काशी में आरा ले लिया है”, और उन्होंने अपने दो प्रतिमा गांव में स्थापित करवाई। तभी से माना जाता है कि ग्राम देवता यहीं रहकर गांव की रक्षा और लोगों को न्याय दिलाते हैं।
झूठ नहीं टिकता देवता के सामने
गांववासी गोरेलाल मिश्रा कहते हैं कि इस पवित्र स्थान पर कोई झूठ नहीं बोल सकता। उन्होंने एक घटना का उदाहरण दिया: स्व. श्री राम खिलावन अवस्थी के समय, जब पंचायत भवन नहीं था, तो ग्राम देवता मंदिर में ही विवाद निपटता था। एक व्यक्ति पर घड़ी चोरी का शक था। जैसे ही आरोपी बधई नाथ मंदिर के सामने आया, उसने सच स्वीकार कर लिया। यह साबित करता है कि ग्राम देवता के सामने दोषी को झूठ बोलना असंभव है।
