
ग्वालियर। हजरत ख्वाजा खानून के 507 वें उर्स शरीफ़ में गत दिवस गद्दी की खास मेहफिल हुई। रूहानी नजरिए से यह उर्स का सबसे खास दिन माना जाता है। इस रोज दरगाह के समाखाने में ख्वाजा खानून की छै सौ साल पुरानी गद्दी सजाई जाती है। मान्यता है कि इस रोज जो सच्चे मन से हाज़िरी लगाते हैं उनकी मुरादें ज़रूर पूरी होती हैं। गद्दी की मेहफिल में सज्जादानशीन हजरत ख्वाजा राशिद खानूनी अपनी परम्परागत पोशाक में समाखाने में सजी गद्दी पर विराजे।इस मौके पर हैदराबाद तेलंगाना से तशरीफ़ लाए कुल हिन्द मरकजी मजलिस अहले सुन्नत उल जमात के नायब सदर जनाव मौहम्मद मुजीब कादरी, उज्जैन से तशरीफ़ लाए सूफी आरिफ रिजबी और स्थानीय गद्दीनशीन विशेष रूप से मौजूद रहे। कब्बाली की मजलिस का आगाज दरगाह की पगड़ी वन्द कब्बाल चौकी जनाब सलीम झंकार और फरीद खानूनी और कब्बाल पार्टियों ने परम्परागत ” कौल ” पेश कर किया। इसके बाद देर शाम तक कब्बाल पार्टी मौहम्मद अशफाक, मौहम्मद फरीद बच्चा पार्टी, मौहम्मद अली, उम्र दराज मासूमी, मक़बूल साबरी,भोलू भाई, एजाज मासूमी यूसुफ नियाजी,फरीद खानूनी और सलीम झंकार पार्टी ने अपने कलाम पेश किए। सज्जादानशीन हजरत ख्वाजा राशिद खानूनी की विशेष दुआ के बाद चादर पेश की गई।आखिर में ख्वाजा की पसंद परम्परागत बेसनी रोटी और खिचड़ी का तबर्रुक तकसीम किया गया।
ख्वाजा के उर्स के सातवें दिन आज 25 अक्टूबर को दोपहर दो बजे से ख्वाजा साहब की गद्दी लगेगी और कब्बाली की मजलिस होगी। अकीदतमंदों से शिरकत करने की गुजारिश की गई है।
