
इंदौर। पूर्व जिला आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र भदौरिया के घर 15 अक्टूबर को हुई तलाशी के बाद जांच अभी भी जारी है. इसके तहत इंदौर के शेष बैंक लॉकर गुरुवार को खोले जाने के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन उनके पुत्र सूर्यांश और पुत्री अपूर्वा उपस्थित नहीं हुए. आज शुक्रवार को उनकी उपस्थिति के लिए पुनः नोटिस तामील किया जाएगा. वहीं, आरोपी धर्मेंद्र भदौरिया की मौजूदगी में ग्वालियर का लॉकर खोला, जो लंबे समय से खाली पड़ा था और इसमें कोई सामान नहीं मिला.
लोकायुक्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रिटायर्ड आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया पर लोकायुक्त की कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. इंदौर और ग्वालियर में हुई छापेमारी के बाद अब लोकायुक्त पुलिस ने उनके और परिवार के नाम पर दर्ज बैंक लॉकरों की जांच शुरू कर दी है. लोकायुक्त की नोटिस के बाद भदौरिया गुरुवार को ग्वालियर स्थित बैंक लॉकर खुलवाने पहुंचे. जांच में पता चला कि इंदौर और ग्वालियर स्थित उनके लॉकर लंबे समय से खाली पड़े थे. पहले दो लॉकर इंदौर में उनके पुत्र और पुत्री के नाम थे, जिन्हें नोटिस तामील कर जांच के लिए पेश होने को कहा गया. वहीं, ग्वालियर स्थित इंडियन बैंक का लॉकर भदौरिया ने खुद खोला. लोकायुक्त डीएसपी सुनील तालान ने बताया कि भदौरिया के सेवाकाल में करीब दो करोड़ रुपए वेतन प्राप्त हुए, लेकिन उनके पास 25 करोड़ रुपए से अधिक की चल-अचल संपत्ति पाई गई. जांच के दौरान भदौरिया की पत्नी सीमा भदौरिया के नाम पर बैंक ऑफ इंडिया में लॉकर से लगभग 79 लाख रुपए मूल्य के आभूषण बरामद हुए थे, लोकायुक्त टीम पूरे परिवार के वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही है और यदि बेहिसाब संपत्ति या नकदी मिलती है, तो आंकड़ा और बढ़ सकता है. मामले में जांच अभी जारी है और लोकायुक्त की अगली कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं.
