सतना : पिछले दो दिनों से तापमान में बढ़ोत्तरी के साथ ही बादलों के मंडराने के बाद बुधवार को सतना और मैहर में कुछ स्थानों पर बारिश देखने को मिली. मौसम के बदले इस मिजाज को देखते हुए उन किसानों की बेचैनी बढ़ गई जिनकी धान की फसल खेतों में खड़ी है. किसानों का मानना है कि यदि तेज हवाओं के साथ बारिश हुई तो धान की फसल जमीन पर गिर जाएगी.
अक्टूबर का दूसरा पखवाड़ा शुरु होते ही मौसम में गुलाबी ठंड घुलना शुरु हो गई थी. लेकिन पिछले 3 दिनों से मौसम में कुछ परिवर्तन होने लगा. जिसके चलते बादलों की आवाजाही के साथ ही तापमान में भी इजाफा होने लगा. मौसम कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को दिन का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. हलांकि यह पिछले दिन की तुलना में आधा डिग्री कम आंका गया. लेकिन वहीं दूसरी ओर रात के न्यूनतम तापमान में पिछले 24 घंटे में 0.6 डिग्री सेल्सियस का इजाफा देखने को मिला.
मौसम की गतिविधि को देखते हुए विभाग द्वारा कुछ स्थानों पर छुट-पुट वर्षा की संभावना भी जताई जा रही थी. इसी कड़ी में बुधवार को जहां मैहर में कुछ देर तक झमाझम बारिश देखने को मिली. वहीं सतना के मझगवां और बिरसिंहपुर क्षेत्र में भी बारिश हुई. तेज हवाओं के साथ शुरु हुई बारिश के चलते एक ओर जहां हवा में घुले धूल के कण जमीन पर बैठ गए. वहीं दूसरी आरे इससे किसानों की बेचैनी बढ़ गई.
मझगवां और बिरसिंहपुर क्षेत्र के किसानों के अनुसार तेज हवाओं के साथ हुई बारिश के चलते खड़ी धान की फसल खेतों में बैठ गई. जिसके चलते उसके सडऩे का खतरा पैदा हो गया. किसानों के अनुसार यदि मौसमी हलचल आगे भी जारी रही तो धान की फसल पर संकट मंडराने लगेगा. वहीं दूसरी ओर मौसम विभाग द्वारा संभावना जताई गई कि मौसम के साफ होते ही हवा में ठंडक घुलने का सिलसिला और तेज हो जाएगा.
