महाकुंभ के पहले उज्जैन में आएगी अफसरों की नई टीम

जिला व पुलिस प्रशासन में होगा बड़ा बदलाव
15 अप्रैल तक लगेगी नई लिस्ट पर मोहर
कागजों पर उकेरे कार्य बदलाव के बाद ही दिखेंगे धरातल पर

उज्जैन: प्रयागराज महाकुंभ में दो तरह के पहलू सामने आए हैं. एक तो 60 करोड़ श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाने पहुंचे, वहीं तमाम व्यवस्थाओं के बावजूद छुटपुट घटनाओं से आयोजन पर सवाल खड़े हुए. यही कारण है कि उज्जैन महाकुंभ 2028 के पहले जिला व पुलिस प्रशासन में बड़ा बदलाव होगा और नई टीम धरातल पर वह काम उतारेगी जो अब तक कागज में उकेरे गए हैं.

नवभारत को मिली जानकारी में सामने आया कि 15 अप्रैल के आसपास मध्य प्रदेश समेत उज्जैन में कई बड़े बदलाव होंगे. प्रदेश के दूसरे जिलों के अफसरों को उज्जैन में तैनात किया जाएगा जिसमें कलेक्टर कमिश्नर एसपी कार्यालय में अफसरों की नई सिरे से तैनाती की जाएगी.

सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट सिंहस्थ
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जिस युद्ध स्तर पर प्रदेश के विकास कार्य में जुटे हुए हैं, ऐसे में उज्जैन में आयोजित होने वाले महाकुंभ को लेकर वह खासे संजीदा है. उज्जैन में दर्जनों योजनाएं कागज पर उकेरी गई है. उन्हें धरातल पर उतारने के लिए भी नई टीम की जरूरत महसूस की जा रही है. यही कारण है कि सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट सफल करने के लिए नए अधिकारियों को मैदान में उतरा जाएगा.

चेंबर छोड़ें मैदान में उतरे
जिला प्रशासनिक कार्यालय के अधिकारियों से लेकर निर्माण एजेंसियों के अधिकारियों ने कई बार यह बात मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचवाई है कि मात्र 3 साल सिंहस्थ के बचे हैं. उसमें 1 साल बारिश का निकल जाएगा. बचे हुए दो साल में सिंहस्थ के बड़े कार्य करना है और मौजूदा अफसर एसी चेंबर में बैठकर दिनभर मीटिंग लेते हैं. मैदान में उतरने से परहेज किया जा रहा है. ऐसे में नए अफसरों को हिदायत जाएगी कि वह चैंबर छोड़े और मैदान में उतरे.

जमीन पर बैठकर वन टू वन करने वालों की जरूरत
संवादहीनता रखने वाले अधिकारी उज्जैन का बना बनाया काम बिगाड़ रहे हैं. जिला प्रशासन पुलिस प्रशासन में कई ऐसे अफसर पदस्थ हो गए हैं जो सिर्फ 10.30 से 5.30 ड्यूटी करके जिम्मेदारी की इति श्री कर रहे हैं. ना शहरवासियों से चर्चा करते हैं, ना प्रमुख जनप्रतिनिधियों से बात करते हैं, ना ही मीडिया और धार्मिक सामाजिक संस्थाओं की अगुवाई करने वालों से संपर्क साध रहे हैं. यही कारण है कि पूरे शहर में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है. अब जो अफसर उज्जैन में आने वाले हैं उन में व्यवहार कुशलता से लेकर जमीन पर बैठकर वन टू वन चर्चा करने की काबिलियत होना चाहिए ताकि वह ग्राउंड जीरो से सिंहस्थ के कार्य आगे बढ़ा सके

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