चित्रकूट में तुलसी उत्सव रघुनाथ गाथा समारोह का हुआ आयोजन

सतना।विगत वर्षो की भांति इस वर्ष भी मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग, जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास एवं तुलसी शोध संस्थान चित्रकूट के द्वारा चार दिवसीय तुलसी उत्सव-रघुनाथ गाथा समारोह तुलसी मंच प्रमोदवन में प्रारम्भ हुआ। समारोह का आयोजन 18 अक्टूबर को दीप प्रज्जवलन तथा तुलसीदास जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर संगठन सचिव दीनदयाल शोध संस्थान अभय महाजन, सारस्वत रामहृदय दास महाराज, प्रो. अवधेश प्रसाद पाण्डेय, पूर्व निदेशक तुलसी शोध संस्थान तथा वर्तमान निदेशक डॉ. मन्जूषा राजस जौहरी की उपस्थित रही।

संगठन सचिव अभय महाजन ने चित्रकूट में दीपोत्सव के महत्व पर सामजिक समरसता तथा सनातन संस्कृति महत्व पर प्रकाश डाला। सांस्वत रामहृदय दास भगवान श्रीराम के चित्रकूट रहने के दौरान विभिन्न घटनाओं का तथा भगवान श्रीराम जी के मर्यादा स्वरूप का वर्णन किया। डॉ. प्रमिला मिश्रा के द्वारा बताया गया कि चित्रकूट में श्री विषय पर व्याख्यान दिया गया तथा रीवा से पधारे डॉ. नलिन दुबे द्वारा दण्डकारण्य मे श्रीराम विषय पर व्याख्यान दिया। इसके पश्चात सुश्री नीलांगी कलात्रे द्वारा लीला प्रस्तुति की गई। कार्यक्रम के अंत में प्रोफेसर अवधेश प्रसाद पाण्डेय द्वारा कार्यक्रम के महत्व एवं चित्रकूट की महिमा, श्रीराम के आदर्श स्वरूप का विवेचन किया। भैरवदास महाराज ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। इसी प्रकार 19 अक्टूबर को श्रीरामलीला विश्व प्रसिद्ध खजुरीताल से रामभूषण दास महाराज द्वारा स्थापित रामलीला कमेटी का संचालन महन्त गुरूप्रसन्न दास महाराज द्वारा किया गया। कार्यक्रम में रामजन्म, ताडकावध, अहिल्या उद्धार के प्रसंगों की बहुत प्रस्तुति की गई। इसके बाद डॉ. राम नारायण त्रिपाठी द्वारा वनवासी श्रीराम के विषय पर व्याख्यान किया गया। प्रांतीय कलाकार संघ रीवा द्वारा श्रीराम जी के जीवन पर आधारित सुन्दर भक्ति संगीत भजन प्रस्तुत किया गया तथा ओरछाधीश सेवा समिति ओरछा द्वारा श्रीमती नीलम सिंह के साथ राघव सिंह द्वारा विनय पत्रिका के कई पद संगीत के साथ प्रस्तुत किये गये।

पूर्व जिला जज अरूण कुमार सिंह ने कहा कि सरलता सहजता पवित्र मन निष्कपट हृदय द्वारा ही भक्ति की जा सकती है तथा ईश्वर से साक्षात्कार हो सकता है। इसके पश्चात पं. अभय माणके इन्दौर के द्वारा राष्ट्रीयस्तर के गीतकार संगीतज्ञ हैं संगीतमयी गीतरामायण प्रस्तुत किया गया। पुष्प् वाटिका, लक्ष्मण-परशुराम संवाद और श्रीराम विवाह की सुन्दर रामलीला किया गया। 20 अक्टूबर 2025 को रामलीला में कैकेई मंथरा संवाद, श्रीराम वन गमन, केवट प्रसंग, भरतमिलाप का मंचन किया गया।

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