गौतमपुरा में हिंगोट युद्ध का रोमांच

44 घायल लेकिन कोई गंभीर नहीं

इंदौर: गौतमपुरा में परंपरागत हिंगोट युद्ध ने इस बार भी हजारों दर्शकों का उत्साह बढ़ाया. करीब डेढ़ घंटे तक चली इस रंगीन और खतरनाक परंपरा में 44 लोग घायल हुए, लेकिन सभी की स्थिति स्थिर बताई जा रही है.गौतमपुरा के धोक पड़वा मैदान में मंगलवार को आयोजित हिंगोट युद्ध ने रोमांच और परंपरा दोनों का संगम दिखाया. गौतमपुरा और रूणजी के वीर योद्धा तुर्रा और कलंगी में बंटकर आग के छर्रे फेंकते रहे.

इस बार युद्ध आधे घंटे पहले ही खत्म कर दिया, ताकि दर्शकों और प्रतिभागियों की सुरक्षा बनी रहे. ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर वंदना केसरी के मुताबिक, मैदान में 35 से अधिक लोग मामूली रूप से घायल हुए. मौके पर मेडिकल टीम ने 30 घायलों का इलाज किया. गौतमपुरा थाना प्रभारी अरुण सोलंकी ने बताया कि गौतमपुरा और आसपास के गांवों से कुल 44 लोग घायल हुए.

इसमें से पांच घायलों को देपालपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और चार लोगों को महावीर अस्पताल में भर्ती कराया, इनमें से एक को फ्रैख्र है, जबकि बाकी सभी की हालत सामान्य है. हिंगोट युद्ध जानलेवा नहीं माना जाता. यह परंपरा साहस, शौर्य और लोक आस्था का प्रतीक है. हार या जीत का सवाल नहीं होता, बल्कि यह दिखाता है कि किस प्रकार युवा परंपरा और आत्मविश्वास के साथ चुनौती का सामना करते हैं.

इस बार 200 से अधिक पुलिसकर्मी सुरक्षा में तैनात थे और दर्शकों के लिए 15 फीट ऊंचे बैरिकेड्स लगाए गए. करीब 15,000 लोग मैदान में मौजूद रहे. अंधेरे में कई बार हिंगोट दूर गिरते रहे, जिससे अधिकांश दर्शक और प्रतिभागी मामूली चोटें ही लेकर लौटे. यह वार्षिक हिंगोट युद्ध न केवल परंपरा का जश्न है, बल्कि शहर में लोक संस्कृति और साहस का जीवंत प्रमाण भी है.

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