
नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2025: बिहार के दरभंगा जिले की बेनीपुर विधानसभा सीट आगामी चुनावों में रणनीतिक चुनौती के रूप में उभर रही है। परिसीमन के बाद 2008 में पुनः अस्तित्व में आई यह सीट मिथिलांचल की पहचान रखती है, जहाँ अब तक छह विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इस क्षेत्र की राजनीति में ब्राह्मण समुदाय का प्रभाव लंबे समय से निर्णायक बना हुआ है, अब तक चुने गए पाँच विधायक इसी समुदाय से रहे हैं। हालांकि, यादव, कुशवाहा, दलित और मुस्लिम मतदाता भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। पिछले दो चुनावों से जदयू इस सीट पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है।
भौगोलिक रूप से बेनीपुर एक अर्ध-शहरी क्षेत्र है, जहाँ खेती मुख्य व्यवसाय है। उपजाऊ भूमि होने के बावजूद, उद्योगों की कमी के कारण युवाओं का पलायन एक बड़ी समस्या है। स्थानीय लोगों के लिए पीने के पानी की किल्लत और उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं की कमी प्रमुख चुनावी मुद्दे हैं। इन स्थानीय समस्याओं और रोजगार के अवसरों की कमी के कारण जनता अब ठोस विकास की अपेक्षा कर रही है। 2024 के आंकड़ों के अनुसार, इस सीट पर 3,01,342 मतदाता हैं, जिनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या अधिक है।
राजनीतिक इतिहास की बात करें तो, 2020 में जदयू के विनय कुमार चौधरी ने कांग्रेस प्रत्याशी को हराकर सीट पर कब्जा बनाए रखा था। 2025 के चुनाव में जदयू संगठनात्मक रूप से मजबूत है, जबकि भाजपा ब्राह्मण वोटों के सहारे वापसी की कोशिश में है। वहीं, कांग्रेस और राजद भी अपने समीकरण साधने की तैयारी कर रहे हैं। स्थानीय असंतोष और बेरोजगारी जैसे मुद्दे विपक्ष को चुनाव में धार देने का मौका दे सकते हैं। बेनीपुर सीट पर ब्राह्मण वोटों की दिशा और विकास के वादों की सच्चाई ही इस बार का जनादेश तय करेगी।
