मास्को/नयी दिल्ली, 18 अक्टूबर (वार्ता) आध्यात्मिक भक्ति और साझा सांस्कृतिक विरासत के एक महान प्रतीक भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी जब रूस के कलमीकिया गणराज्य में लगाई गई, तो उसको देखने के लिए वहां भारी भीड़ उमड़ी।
एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि 50,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रतिष्ठित गेडेन शेडुप चोइकोरलिंग मठ, जिसे ‘शाक्यमुनि बुद्ध का स्वर्ण निवास’ के रूप में भी जाना जाता है, में स्थापित अवशेषों के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की है।
भारत की राष्ट्रीय धरोहर माने जाने वाले इन पवित्र अवशेषों को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल द्वारा राजधानी एलिस्टा लाया गया। इस अवसर पर कई वरिष्ठ भारतीय भिक्षु भी उपस्थित थे।
यह प्रतिनिधिमंडल यूरोप के एकमात्र ऐसे क्षेत्र जहां बौद्ध धर्म प्रमुख धर्म है, कलमीकिया की बौद्ध बहुल आबादी के लिए विशेष धार्मिक सेवाएं और आशीर्वाद कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। यहां 11 अक्टूबर को प्रदर्शनी शुरू होने के बाद से ही आध्यात्मिक उत्साह दिखाई दे रहा है। शनिवार को मठ से लगभग एक किलोमीटर दूर तक भक्तों की कतार को देखकर आयोजन की गहन गूंज महसूस की जा सकती है।
वर्ष 1996 में खुले और विशाल काल्मिक मैदान में स्थित एक महत्वपूर्ण तिब्बती बौद्ध केंद्र ‘द गोल्डन एबोड’ में सुबह से ही तीर्थयात्रियों का तांता लगा हुआ है। रूसी गणराज्य में अपनी तरह का पहला यह ऐतिहासिक प्रदर्शनी भारत और रूस के बीच गहरे सभ्यतागत संबंधों का प्रमाण है।
यह लद्दाख के प्रतिष्ठित बौद्ध भिक्षु और राजनयिक 19वें कुशोक बकुला रिनपोछे की विरासत को पुनर्जीवित करता है, जिन्होंने मंगोलिया में बौद्ध धर्म को पुनर्जीवित करने और कलमीकिया, बुरातिया और तुवा जैसे रूसी क्षेत्रों में बौद्ध धर्म में रुचि जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
इस कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के बीटीआई अनुभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी), राष्ट्रीय संग्रहालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सहयोग से किया गया है। इस प्रदर्शनी का राजधानी एलिस्टा में 18 अक्टूबर, 2025 को समापन हो रहा है।
प्रवक्ता ने कहा, “इन पवित्र अवशेषों की मेजबानी में भारत की भागीदारी साझा बौद्ध विरासत और भारत और रूस के लोगों के बीच स्थायी आध्यात्मिक संबंध का सशक्त प्रतीक है।”

