आईडीए के गले पड़ा 103 करोड़ का हाथी, नहीं मिल रही अनुभवी कंपनी

इंदौर:आईडीए द्वारा निर्मित कुमेड़ी आईएसबीटी का टेंडर निरस्त करने की संभावना है. इसका कारण यह है कि अभी तक टेंडर में भाग लेने वाली कोई भी कंपनी को बस स्टैंड चलाने का अनुभव नहीं है. इस वजह से 103 करोड़ रुपए की लागत से बना आईएसबीटी आईडीए के लिए हाथी पालने जैसा हो गया है.एमआर 10 पर कुमेड़ी में बना आईएसबीटी अब आईडीए के लिए सिरदर्द और परेशानी का कारण बनता जा रहा है. आईडीए ने आईएसबीटी को बहुत भव्य बना दिया है. इसकी भव्यता ही इसके टेंडर नहीं होने का कारण बन गई है. आईडीए चार बार से आईएसबीटी का संचालन और संधारण करने के लिए प्रयास कर रहा है, लेकिन हर बार कुछ न कुछ कारण से टेंडर निरस्त करना पढ़ रहा है.
चौथी बार के टेंडर में ग्वालियर की कंपनी आईडीए की डिपाजिट राशि और मासिक किराया देने पर सहमत हुई. कंपनी के जबलपुर नगर निगम में बस संचालन के काम की जानकारी आईडीए ने अपने स्तर पर ली, जिसमें कंपनी की रिपोर्ट संतोषजनक आई. इसके बावजूद आईडीए के अधिकारियों को टेक्निकल अनुभव और साफ-सफाई को लेकर संदेह है. आईएसबीटी को लेकर आईडीए खुद भी असमंजस में है कि इतनी बड़ी प्रॉपर्टी को कैसे दे दें.

आईएसबीटी कहीं रीजनल पार्क जैसा खस्ताहाल नहीं बन जाए और जनता एवं बस संचालक समस्या ही बताते नजर आएं और आईएसबीटी मीडिया में रीजनल पार्क जैसा खबरों की सुर्खियों में बना रहे. ध्यान रहे कि आईडीए ने पिपलियापाला रीजनल पार्क को भी 50 करोड़ रुपए की राशि खर्च कर भव्य पार्क बनाया था, लेकिन नगर निगम को सौंपते ही रीजनल पार्क बदहाल हो गया. अब वह असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है. बहरहाल, आईएसबीटी का टेंडर निरस्त करने की संभावना बढ़ गई है. इसका कारण यह है कि देश में कोई कंपनी के पास निजी तौर पर बस स्टैंड चलाने का अनुभव और जानकारी नहीं है.

चौथी बार होगा टेंडर निरस्त
आईडीए आईएसबीटी के संचालन और संधारण के लिए चार बार टेंडर निकाल चुका है. तीन बार टेंडर में भाग लेने वाली कंपनियां सक्षम नहीं पाई गई. चौथी बार में तीन कंपनियों ने टेंडर में हिस्सा लिया था, जिसमें से एक ग्वालियर की कंपनी अनुकूल पाई गई, लेकिन अनुभव और रख-रखाव में आईडीए के इंजीनियर कंपनी के प्रपोजल से संतुष्ट नहीं हैं. इससे माना जा रहा है कि चौथी बार भी टेंडर निरस्त होकर बोर्ड बैठक में नए सिरे से आईएसबीटी के संचालन की योजना बनाई जा सकती है.

पहले चरण में 250 बसें चलाने का लिया था निर्णय
तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह और संभागायुक्त दीपक सिंह ने पहले चरण में आईएसबीटी से 250 बसें चलाने का ऐलान किया था. यह ऐलान शहर में बिगड़े यातायात को सुधारने के लिए आयोजित हुई बैठक में किया गया था. उक्त बैठक में दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाली बसों को शुरू करने का निर्णय लिया गया था. साथ ही बैठक में आईडीए को तुरंत आईएसबीटी बस स्टैंड के टेंडर जारी करने के निर्देश दिए गए थे.

 

आईएसबीटी की दुकानें निजी लोगों को बेचने का सुझाव
आईडीए सूत्रों के अनुसार, संभागायुक्त सुदामा खाड़े ने आईएसबीटी की 38 दुकानें, 16 रेस्टोरेंट और करीब 20 ऑफिस अलग से बेचने की अधिकारियों से चर्चा की थी. अधिकारियों को सुझाव दिया था कि सिर्फ बस स्टैंड संचालन का ठेका दें, जबकि दुकान, रेस्टोरेंट और ऑफिसेस को निजी लोगों को लीज पर बेच दें. उक्त चर्चा संभागायुक्त ने आईएसबीटी सहित सभी योजनाओं की जानकारी और रिपोर्ट प्रस्तुतिकरण के दौरान आईडीए की पहली विस्तृत बैठक में कही थी. इसके बाद से आईएसबीटी के टेंडर को लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है.

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