इंदौर: प्रशासन द्वारा शहर में गोबर से बने दीये खरीदने और बिक्री का प्रचार किया जा रहा है. इसको प्रशासन का नवाचार बताया जा रहा है, मगर गोबर के दीयों से अग्निकांड का खतरा है. कंडा ज्वलनशील वस्तु की श्रेणी में आता है.पिछले दिनों नगर निगम हातोद गौ शाला में स्वदेशी आंदोलन को समर्थन करने के साथ गोबर से बने दीयों का निर्माण करने का नवाचार बताया था. इसके लिए दो मशीन हातोद गौ शाला में लगवाई थी. इतना ही नहीं, बाकी शहर में अलग अलग ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर दीये बनाने के लिए ओर मशीनें लगाने की बात कही थी.
प्रशासन ने दो लाख से ज्यादा दीये बनाने के साथ गो पालकों को भी गोबर दीये बनाने के लिए प्रोत्साहन करने की बात कही थी. वहीं आज से शहर में गोबर दीयों के अलग अलग स्थानों पर बिक्री केंद्र भी खोले गए हैं. एक बिक्री केंद्र कलेक्टर कार्यालय परिसर में भी खोला गया है. अब गोबर से बने दीयों को लेकर सवाल उठता है कि क्या इनसे आग नहीं लगेगी? इसकी क्या गारंटी है? गोबर के दीयों में तेल भरने पर पी (सोख) भी जाएंगे. ध्यान रहे कि सनातन धर्म में हवन से लेकर अंतिम संस्कार में गोबर से बने कंडों का उपयोग किया है. ऐसे में दिवाली के त्यौहार पर गोबर के दियों से अग्निकांड का खतरा बढ़ सकता है.
मंदसौर में हो चुकी है घटना
करीब 6-7 साल पहले मंदसौर में गोबर से बने दीयों का निर्माण और बिक्री हो चुकी है. उक्त नवाचार में कई घरों में गोबर से बने दीयों ने आग पकड़ ली थी. इसके बाद गोबर से बने दिए मंदसौर जिले में बनना बंद किए गए. उसका सिर्फ एक कारण है कि गोबर सूखने पर ज्वलनशील वस्तु बन जाता है. सनातन धर्म में अग्नि प्रज्वलित करने और धूप ध्यान में इसका प्रयोग होता है.
यह खतरनाकः मिश्रा
नगर निगम के पूर्व उपायुक्त और फायर विभाग रिटायर्ड डीएसपी रविकांत मिश्रा ने कहा कि सूखा गोबर के दीये तो ज्यादा खतरनाक है । इससे अग्निकांड होने की आशंका बढ़ जाएगी। कंडा तेल से और ज्यादा आग पकड़ेगा। यह दीये पूरी तरह से आग लगने के प्रतीक हो सकते है। पूर्व में भी चार साल पहले तत्कालीन आयुक्त प्रतिभा पाल ने एनजीओ को उपकृत करने के लिए गोबर के दीये बनवाकर 5 – 5 हजार के दीये खरीदने पर मजबूर किया था। उन गोबर दीयों ने तेल के साथ आग पकड़ ली थी और बाद में नहीं जलाए थे
