
उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि अवंतिका ऐसी नगरी है जिसका न आदि है न अंत, यह हर युग में जीवंत रही है। महाकाल की यह भूमि कालचक्र की साक्षी है और इसकी हर धूल में संस्कृति और चेतना समाई हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विक्रम विश्वविद्यालय का शिलालेख केवल पत्थर नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और आत्मगौरव का प्रतीक है। यहाँ विक्रमादित्य काल की परंपरा आज भी ज्ञान और साधना के रूप में प्रवाहित हो रही है। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि सम्राट विक्रमादित्य की भावना का जीवंत रूप है।
मुख्यमंत्री ने भावुक होकर कहा कि मैं भी इसी विश्वविद्यालय का विद्यार्थी रहा हूँ, आज मुख्यमंत्री के रूप में इसी भूमि पर खड़ा होना मेरे जीवन का पुण्य अवसर है। यह क्षण मेरे लिए करवा चौथ की पूर्णिमा जैसा है,जैसे सुहागिनें चाँद देखकर अपने सुहाग की आयु बढ़ाती हैं, वैसे मैं विश्वविद्यालय को देखकर अपनी प्रेरणा बढ़ी हुई महसूस करता हूँ।
उन्होंने कहा कि विक्रम विश्वविद्यालय ने प्रदेश और देश को अनेक विभूतियाँ दी हैं, जिनमें डॉ. शंकर दयाल शर्मा, डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ और डॉ. विष्णु श्रीधर वाकड़कर जैसी प्रतिभाएँ शामिल हैं।
डॉ. यादव ने कहा कि दो हजार वर्ष बाद भी सम्राट विक्रमादित्य का जीवन हमें प्रेरित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमारे युग के सच्चे विक्रमादित्य हैं, जिन्होंने कठिनाइयों से जूझकर देश को आत्मनिर्भरता की दिशा दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विश्वविद्यालय ज्ञान, संस्कृति और कर्म की त्रिवेणी है। विक्रमादित्य की परंपरा हमें सिखाती है कि शासन, ज्ञान और सेवा जब एक साथ चलते हैं, तभी समाज प्रगतिशील बनता है। उन्होंने कहा कि आज का यह अवसर उनके जीवन का दूसरा प्रवेश दिवस है, जब वे पुनः विद्यार्थी बनकर अपने विश्वविद्यालय के आँचल में लौटे हैं।
