दवा बदलकर 3 महीने तक प्रयोग करते रहे चिकित्सक

सतना : बेटी का स्वास्थ्य बगडऩे पर पिता ने उसे शहर के एक निजी चिकित्सक को दिखाया.चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवा का सेवन करने पर बेटी का स्वास्थ्य और बिगडऩे लगा. जिसके चलते चिकित्सक द्वारा बिना कोई जांच कराए ही पिछले 4 महीने में 6 बार दवा बदल दी गई. इसके बावजूद भी जब लडक़ी का स्वास्थ्य नहीं सुधरा तो चिकित्सक ने बायोप्सी जैसी मंहगी जांच लिखते हुए क्लीनिक से दुत्कार कर भगा दिया गया. इस घटना से आहत पिता द्वारा  मामले की लिखित शिकायत सीएमएचओ से की गई है.

शहर से सटे बदखर क्षेत्र के निवासी विनोद सिंह की 11 वर्षीय पुत्री का स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण वे उसे निजी क्लीनिक संचालित करने वाले चिकित्सक डॉ. देवेश अग्रवाल के पास ले गए थे. चार महीने पहले 11 जून को  जब विनोद अपनी पुत्री को डा. देवेश अग्रवाल की क्लीनिक पर लेकर गए तो चिकित्सक द्वारा बिना कोई जांच कराए ही दवा लिख दी गई. उक्त दवाओं का सेवन करने के कुछ दिन बाद विनोद अपनी बेटी को लेकर फिर डॉ. अग्रवाल की क्लीनिक पर पहुंचे.

जहां पर उन्होंने डॉ. अग्रवाल को बताया कि उनके द्वारा लिखी गई दवा बेटी को नुकसान कर रही है. लिहाजा डॉ. अग्रवाल ने दवा बदलकर दूसरी दवा लिख दी. डॉ. अग्रवाल द्वारा दवा बदलने का यह क्रम 9 जुलाई, 9 अगस्त, 12 अगस्त, 12 सितंबर और 20 सितंबर तक चलता रहा. इस दौरान विनोद बार बार डॉ. अग्रवाल से यही निवेदन करते रहे कि लिखी जा रही दवाएं उनकी बेटी को नुकसान पहुंचा रही हैं.

लेकिन डॉ. अग्रवाल दवा बदलकर यह आश्वासन देते रहे कि अब उनकी बेटी ठीक हो जाएगी. इसी कड़ी में दो दिन पहले 6 अक्टूबर को विनोद अपनी बेटी को लेकर एक बार फिर से डॉ. अग्रवाल की क्लीनिक में पहुंचे. लेकिन इस बार डॉ. अग्रवाल ने बेटी की बायोप्सी जांच कराने के लिए लिख दिया.  जिस पर विनोद ने बताया कि वे इतनी मंहगी जांच करा पाने में सक्षम नहीं हैं. इतना सुनते ही डा. अग्रवाल ने विनोद को दुत्कारते हुए केबिन से बाहर निकाल दिया और बेटी का उपचार करने से मना कर दिया.
और कहीं नहीं मिलती दवा
पीडि़त विनोद के अनुसार पिछले 4 महीने में 6 बार दवा बदलने और क्लीनिक की फीस भरने में उनका 20 हजार से अधिक खर्च हो गया. लेकिन दवाएं बेटी को नुकसान ही करती रहीं. विनोद के अनुसार डॉ. देवेश अग्रवाल द्वारा लिखी जाने वाली सारी दवाएं न केवल बहुत मंहगी होती हैं बल्कि वह उन्हीं के मेडिकल स्टोर में ही मिल पाती हैं. उसके अलावा वह दवाएं कहीं और नहीं मिलतीं. जिसे देखते हुए विनोद द्वारा सीएमएचओ से लिखित शिकायत करते हुए जांच कार्रवाई की मांग की गई है.

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