जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट में प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में आरक्षित वर्ग के लिए पात्रता परीक्षा के निर्धारित अंक के नियम को चुनौती दी गई है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस डीडी बंसल की युगलपीठ ने मामले में स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, ट्रायबल वेलफेयर विभाग के प्रमुख सचिव, आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।
यह मामला पन्ना निवासी दीपक गर्ग व अन्य की ओर से दायर किया गया है। जिसमें कहा गया है कि भर्ती नियम 2024 के नियम 12.4 की वैधानिकता को चुनौती दी गई है। इस नियम के अनुसार आरक्षित वर्ग के ऐसे अभ्यर्थी जिन्होंने पात्रता परीक्षा में 90 से कम अंक प्राप्त किए हैं, उनकी पात्रता चयन परीक्षा के आरक्षित प्रवर्ग में ही मान्य होगी। चयन परीक्षा में मेरिट में आने पर भी ऐसे अभ्यर्थी अनारक्षित प्रवर्ग में चयन हेतु पात्र नहीं होंगे।
आवेदकों की ओर से कहा गया कि यह प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के सौरव यादव बनाम उत्तर प्रदेश एवं तेज प्रकाश पाठक बनाम राजस्थान उच्च न्यायालय और इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ में दिए फैसलों के प्रतिकूल है। इन प्रकरणों में सुको ने यह स्पष्ट किया है कि आरक्षित वर्ग के मेरिटोरियस अभ्यर्थी सामान्य वर्ग में चयन हेतु पात्र होते हैं। दलील दी गई कि याचिकाकर्ता के पात्रता परीक्षा 82 अंक थे और चयन परीक्षा में 40 परसेंटाइल थे। वहीं अनारक्षित वर्ग में 12 एवं 17 परसेंटाइल वालों का चयन हुआ क्योंकि उनके पात्रता परीक्षा में 90 अंक से अधिक थे। मामले की सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आर्यन उरमलिया ने पक्ष रखा।
