
इंदौर. सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत इंदौर से उज्जैन के बीच प्रस्तावित ग्रीन फील्ड कॉरिडोर को लेकर किसानों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. हातोद और सांवेर क्षेत्र के सैकड़ों किसान ट्रैक्टरों पर सवार होकर हातोद से इंदौर तक रैली निकालते हुए पहुंचे. किसानों ने आरोप लगाया कि शासन इस सड़क के नाम पर उनकी उपजाऊ जमीनें बिना उचित मुआवजा दिए अधिग्रहित कर रहा है.
शासन ने सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए इंदौर-उज्जैन के बीच नई सड़क बनाने की मंजूरी दी है. इस परियोजना को ग्रीन फील्ड कॉरिडोर नाम दिया है, जिसके तहत 28 गांवों की जमीनें अधिग्रहित की जा रही हैं, जिनमें से 20 गांव सांवेर और हातोद तहसील के हैं, जबकि शेष गांव उज्जैन जिले में आते हैं. प्रस्तावित सड़क हातोद से कांकरिया, अजदोन, चंद्रावतीगंज होते हुए उज्जैन के चिंतामण गणेश मंदिर क्षेत्र तक जाएगी. बुधवार को विरोध स्वरूप किसानों ने हातोद से गांधी नगर, सुपर कॉरिडोर, नावदा पंथ मार्ग होते हुए सिरपुर तक ट्रैक्टर रैली निकाली. बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों के सड़क पर उतरने से धार रोड पर करीब दो घंटे तक यातायात बाधित रहा. सिरपुर पहुंचने के बाद किसान कलेक्टर कार्यालय तक पैदल मार्च निकालने की तैयारी में थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया. इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच कुछ देर बहस भी हुई, बाद में एसडीएम और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों से ज्ञापन लिया. किसानों ने कहा कि सरकार बिना आवश्यकता नई सड़क बना रही है, जबकि इंदौर-उज्जैन मार्ग पहले से ही छह लेन और देवास-उज्जैन रोड फोरलेन हो चुका है. ऐसे में “सिंहस्थ के बहाने जमीनें छीनी जा रही हैं. किसानों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि कोई भी दल ग्रामीणों की बात नहीं सुन रहा. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भूमि अधिग्रहण रद्द नहीं किया और मुआवजा नीति पारदर्शी नहीं बनी तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा.
