जबलपुर: दस साल के बच्चे को कक्षा 9 वीं में अस्थाई प्रवेश दिये जाने के संबंध में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की तरफ से हाईकोर्ट में अपील दायर की गयी थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस डी डी बसंल की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से प्रतिभाशाली बच्चों को समायोजित की नीतियों के संबंध में स्पष्टीकरण माँगा है। याचिका पर अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित की गयी है।
सीबीएसई के चेयरमैन की तरफ से दायर अपील में कहा गया था कि एकलपीठ ने दस वर्षीय छात्र को कक्षा 9 वीं में अस्थाई तौर प्रवेश देने के आदेश जारी किये गये है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विशेष कक्षाओं में प्रवेश के लिए आयु मानदंड निर्धारित किया गया है। अपील की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने टिप्पणी की जिस दिन यह मामला सूचीबद्ध हुआ, उसके अगले दिन फिर से देश के एक सबसे युवा सर्जन की खबर आई।
वह व्यक्ति 13 या 14 साल की उम्र में सर्जन कैसे बन गया केन्द्र सरकार की तरफ से बताया गया कि इस संबंध में संबंधित विभाग से परामर्श मांगा गया है,जो अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। युगलपीठ ने पाया कि देश में इन प्रतिभाशाली बच्चों को पहले से ही मान्यता प्राप्त है, 12 साल की उम्र में छात्र आईआईटी की पढ़ाई कर रहा है। आईआईटी भारत में है, इस तरह के बच्चों को मान्यता दे रहे हैं। केन्द्र सरकार के अधिवक्ता ने निर्देश प्राप्त करने के लिए एक सप्ताह का समय प्रदान करने का आग्रह किया।
युगलपीठ के पूछने पर केन्द्र सरकार की तरफ से बताया गया कि छात्र को अस्थाई तौर पर कक्षा 9 वीं में प्रवेश दिया गया है। युगलपीठ ने कहा था कि दुनिया भर के असाधारण छात्रों ने कम उम्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं और उन्हें केवल नीतिगत प्रतिबंधों के कारण रोका नहीं जाना चाहिए। अदालत ने केंद्र सरकार से ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों को समायोजित करने की नीतियों के बारे में भी स्पष्टीकरण माँगा है।
